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छह सफल रीनल डिनर्वेशन प्रक्रियाओं के साथ एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन हासिल किया

— यह संख्या गुजरात में सबसे ज्यादा अहमदाबाद। मैरिंगो सिम्स हॉस्पिटल ने छह रेनल डिनर्वेशन (RDN) प्रोसीजर पूरे करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह संख्या गुजरात में सबसे ज़्यादा है और भारत में सबसे ज़्यादा में से एक है। ये प्रोसीजर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट की एक सीनियर टीम ने किए, जिसमें डॉ. केयूर पारिख, […]

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— यह संख्या गुजरात में सबसे ज्यादा

अहमदाबाद। मैरिंगो सिम्स हॉस्पिटल ने छह रेनल डिनर्वेशन (RDN) प्रोसीजर पूरे करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह संख्या गुजरात में सबसे ज़्यादा है और भारत में सबसे ज़्यादा में से एक है। ये प्रोसीजर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट की एक सीनियर टीम ने किए, जिसमें डॉ. केयूर पारिख, डॉ. विपुल कपूर और डॉ. तेजस वी. पटेल शामिल थे। यह माइलस्टोन अस्पताल को भारत में रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन के लिए एडवांस्ड थैरेपी प्रदान करने वाले अग्रणी केंद्रों में स्थान दिलाता है। एक मामले में 57 वर्षीय पुरुष का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 200 mmHg से अधिक बना हुआ था, जबकि वे सात
एंटी-हाइपरटेंसिव दवाओं पर थे। उनकी मेडिकल हिस्ट्री में कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, डायबिटीज़, डबल-वेसल डिज़ीज़ तथा पहले से लेफ्ट सर्कमफ्लेक्स कोरोनरी स्टेंट (2014) शामिल है। इसके अलावा, प्रतिदिन 6–7 दवाएं लेने के बावजूद स्टैंडर्ड हाई ब्लड प्रेशर ट्रीटमेंट अप्रभावी रहा था। मैरिंगो सिम्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. केयूर परिख ने कहा कि, ‘जब किसी मरीज का ब्लड प्रेशर तीन या उससे अधिक दवाएँ लेने के बावजूद 140/90 mmHg से ऊपर बना रहता है, तो स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर और किडनी को नुकसान होने का जोखिम काफी बढ़ जाते है। रीनल डिनर्वेशन हमें और दवाएँ जोड़ने के बजाय रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन के मूल कारण को लक्षित करने की अनुमति देता है।’ 27 जनवरी 2026 को मैरिंगो सिम्स हॉस्पिटल में डॉ. केयूर पारिख की देखरेख में, डॉ. तेजस वी. पटेल और डॉ. विपुल कपूर के सहयोग से तथा एनेस्थेटिक स्टैंडबाय के रूप में डॉ. हिरन धोलकिया द्वारा रेनल डेनेर्वेशन प्रक्रिया की गई। दाहिनी फेमोरल धमनी के माध्यम से, Simplicity Spyral™ कैथेटर और AI-सक्षम Simplicity G3 जनरेटर का उपयोग करते हुए सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध द्विपक्षीय रीनल डिनर्वेशन किया गया।
लगभग तीन घंटों में, कुल 36 रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन्स (23 दाहिनी ओर और 13 बाईं ओर) सफलतापूर्वक किए गए, जिससे रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन के लिए ज़िम्मेदार ओवरएक्टिव रीनल सिम्पेथेटिक नसों को सुरक्षित रूप से निष्क्रिय किया गया। इसी तरह का एक अन्य मामला कुछ महीने पहले भी सफलतापूर्वक सुलझाया गया था, जिसमें एक मध्यम आयु की महिला का BP प्रतिदिन 6 दवाएँ लेने के बावजूद 200 mmHg से अधिक बना रहता था। वर्तमान में, वह महिला केवल 2 टैबलेट ले रही हैं और उनका BP लगभग 130/80 mmHg पर स्थिर है।