
— आयुष्मान भारत जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं के लिए बढ़ा हुआ आवंटन प्रतिपूर्ति प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाएगा
अहमदाबाद। यूनियन बजट से पहले, स्टर्लिंग हॉस्पिटल्स ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को और मजबूत बनाने, उपचार क्षमता बढ़ाने, किफ़ायती इलाज सुनिश्चित करने और दीर्घकालिक सिस्टम रेज़िलिएंस को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर और टार्गेटेड ईन्वेस्टमेन्ट की आवश्यकता पर भार दिया है।
स्टर्लिंग हॉस्पिटल्स के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर अमरेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटन में वृद्धि से सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का सुचारू अमलीकरण सुनिश्चित होगा और मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार आएगा। आयुष्मान भारत जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं के लिए बढ़ा हुआ आवंटन प्रतिपूर्ति प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाएगा, होस्पिटल्स के संचालन को समर्थन देगा और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में सक्षम करेगा। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुरूप जीडीपी के 2.5% तक स्वास्थ्य व्यय को संरेखित करने से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, टेकनोलोजी एडोप्शन और मानव संसाधन विस्तार को आवश्यक गति मिलेगी।
अमरेन्द्र गुप्ता ने प्राइवेट हास्पिटल्स के लिए बजटीय प्रोत्साहनों के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जिससे क्षमता निर्माण और कुशल मानव संसाधन विकास में निवेश को बढ़ावा मिल सके। इसमें नर्सिंग, आईसीयू केयर प्रोफेशनल्स, एलाइड हेल्थकेयर स्टाफ और मेडिकल टेक्नीशियंस शामिल हैं।
स्वदेशी भारतीय सर्जिकल डिवाइसेज़ के लिए प्रोत्साहन
“एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के प्रशिक्षण और विस्तार के लिए लक्षित प्रोत्साहन कौशल की कमी को दूर करने, संचालन दक्षता बढ़ाने और कुल स्वास्थ्य सेवा लागत को कम करने में मदद करेंगे, जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा।” टेकनोलोजी के क्षेत्र में, स्टर्लिंग हॉस्पिटल्स ने स्वदेशी भारतीय सर्जिकल डिवाइसेज़ और AI-आधारित प्रोग्राम्स के लिए कर सहायता और लक्षित प्रोत्साहन प्रदान करने की सिफारिश की, जिससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के महंगे उपकरणों की खरीद और मेईन्टेनन्स से जुड़े भारी खर्च को कम किया जा सके। इसके साथ ही, प्राईवेट होस्पिटल्स को AI-सक्षम तकनीकों को अपनाने और अग्रणी विदेशी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के साथ सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि तेज़ी से तकनीक ट्रांसफर, कौशल विकास और उन्नत मेडिकल इनोवेशन का स्थानीयकरण संभव हो सके तथा मरीजों के परिणामों में सुधार आए।
डिजिटल हेल्थ केयर को बढ़ावा
“मेडिकल डिवाइसेज़ और डिजिटल हेल्थकेयर में डोमेस्टिक ईन्नोवेशन को प्रोत्साहित करने से आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और किफ़ायत तथा पहुंच में सुधार होगा।” हॉस्पिटल ग्रुप ने क्लिनिकल रिसर्च और स्वदेशी दवाओं के विकास के लिए तेज़ नियामक मंज़ूरी की आवश्यकता पर भी फोकल कीया, ताकि पब्लिक हेल्थ ईमरजन्सी की स्थितियों के दौरान ईमरजन्सी ट्रिटमेन्ट संभव हो और भारत के बढ़ते लाइफ साइंसेज़ इकोसिस्टम को समर्थन मिले। इसके अलावा, अमरेन्द्र गुप्ता ने पब्लिक हेल्थकेर योजनाओं के तहत शासन तंत्र को सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मेडिकल ईन्स्योरन्स और रिईम्बर्समेन्ट से जुड़े मामलों का समयबद्ध समाधान हो सके। क्लेम प्रोसेसिंग और विवाद निवारण में देरी के कारण अस्पतालों और मरीजों के परिवारों पर भारी फाईनान्शियल प्रेशर हो जाता है, क्योंकि विवाद सुलझने तक इलाज का खर्च उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है। एक संरचित, पारदर्शी और जवाबदेह शिकायत निवारण प्रणाली इस वित्तीय तनाव को कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं पर भरोसा बढ़ाने में सहायक होगी।
Published on:
28 Jan 2026 08:24 am
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