AI-generated Summary, Reviewed by Patrika
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Ahmedabad. प्रवासी पक्षियों के लिए गुजरात पसंदीदा ठिकाना बन रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वर्ष 2024-25 में राज्य के विभिन्न जल सरोवर क्षेत्रों में 8.33 लाख से अधिक पक्षी पहुंचे। इनमें प्रवासी पक्षियों के साथ स्थानीय प्रजाति के पक्षी भी शामिल हैं। गुजरात में वर्ष 2023 की गणना के तहत 2.85 लाख मोर भी हैं।
गुजरात सरकार के वन विभाग ने राष्ट्रीय पक्षी दिवस 5 जनवरी की पूर्व संध्या पर वर्ष 2024-25 में राज्य में आए स्थानीय-प्रवासी पक्षियों के आंकड़े जारी किए। गुजरात में चार रामसर साइट हैं। इसमें नल सरोवर को 2012 में जबकि खिजडिया, थोल और वढवाणा को वर्ष 2021 में रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है।
जामनगर के खिजड़िया पक्षी अभयारण्य में 334 प्रजातियों के लगभग 309062 पक्षी दर्ज किए गए। वर्ष 2024 की पक्षी गणना के तहत नल सरोवर में 17 प्रजातियों के 4.12 लाख पक्षी और थोल पक्षी अभयारण्य में 17 प्रजाति के 55587 पक्षी पहुंचे थे। इन दोनों जगहों पर कुल 4.67 लाख पक्षी देखे गए।
वडोदरा जिले की डभोई तहसील के वढवाणा वेटलैंड में 2024-25 में 54 हजार से अधिक और कच्छ क्षेत्र में वर्ष 2025 में लगभग 2,564 पक्षी दर्ज किए गए। वडोदरा जिले की डभोई तहसील के वढवाणा वेटलैंड में वर्ष 2024-25 में 41 प्रजाति के 35932 प्रवासी पक्षी देखने को मिले। 91 स्थानीय प्रजाति के 12921 पक्षी दर्ज किए गए।
दुनिया में पक्षियों की 9,000 प्रजातियों में से भारत में लगभग 1,200 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 400 से अधिक प्रवासी पक्षी साइबेरिया, यूरोप और एशिया से आते हैं। गुजरात में 334 प्रजाति से ज्यादा पक्षी देखने को मिलते हैं।
जामनगर का खिजडि़या पक्षी अभयारण्य पक्षियों का पसंदीदा स्थल है। यहां ब्लेक नेक्ड स्ट्रॉर्क, फ्लेमिंगो, गाज हंस, डॉक ढोंक, किंगफिशर, ईगल, शकरे, काइट सहित 334 प्रजाति के पक्षी देखे जा सकते हैं।
120.82 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला यह पक्षी अभयारण्य 2012 में ‘रामसर साइट’ बना। यहां 329 प्रजाति के पक्षी देखने को मिलते हैं। यह प्रवासी पक्षियों के सेंट्रल एशियन फ्लाय वे का स्थल है।थोल अभयारण्य : यहां बतख, हंस, बगुले और बाज बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।वढवाणा वेटलैंड : यहां गाज हंस (ग्रे लेग गूज), राज हंस (बार-हेडेड गूज), रेड क्रेस्टेड पोंचर्ड, टफ्टेड डक जैसी की प्रवासी प्रजाति के पक्षी देखने को मिलते हैं।
कच्छ क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए ‘रिफ्यूलिंग स्टेशन’ माना जाता है। 19-21 सितंबर 2025 के दौरान यहां पैसेज माइग्रंट काउंट किया गया, जिसमें 200 पक्षी प्रेमी जुड़े थे। यहां 1577 यूरोपियन रोलर और 313 स्पोटेड फ्लाय केचर देखे गए। 379 ब्ल्यू चेकड बी इटर सहित 10,000 वर्ग किमी क्षेत्र में 250 से अधिक प्रजातियां देखी गईं।
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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
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Published on:
04 Jan 2026 10:15 pm


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