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अनमोल तोहफा: हेरिटेज सिटी अहमदाबाद में शुरू हुआ पहला रेडियो संग्रहालय

Ahmedabad. देश की पहली हेरिटेज सिटी अहमदाबाद में लोगों को विश्व रेडियो दिवस की पूर्व संध्या पर एक अनमोल तोहफा मिला है। रेडियो के शौकीन सिद्धार्थ पटेल ने शहर के गुलबाई टेकरा में सर्वयोगम् रेडियो म्यूज़ियम शुरू किया है। यहां वर्ष 1940 से 1980 में बने देश-विदेश के पुराने व दुर्लभ 120 रेडियो का अदभुत […]

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अहमदाबाद में शुरू हुआ रेडियो म्यूजियम।

Ahmedabad. देश की पहली हेरिटेज सिटी अहमदाबाद में लोगों को विश्व रेडियो दिवस की पूर्व संध्या पर एक अनमोल तोहफा मिला है। रेडियो के शौकीन सिद्धार्थ पटेल ने शहर के गुलबाई टेकरा में सर्वयोगम् रेडियो म्यूज़ियम शुरू किया है। यहां वर्ष 1940 से 1980 में बने देश-विदेश के पुराने व दुर्लभ 120 रेडियो का अदभुत कलेक्शन देखने को मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि इसमें से 80 फीसदी से ज्यादा रेडियो आज भी अपनी स्वर लहरें बिखेरने में सक्षम हैं।

इस रेडियो म्यूजियम के स्थापक पटेल ने बताया कि वे वर्ष 1981 से वाल्व ट्यूब रेडियो का संग्रह कर रहे हैं। आज उनके पास भारत, अमरीका, इंग्लैंड, जर्मनी, हॉलैंड नीदरलैंड सहित कई देशों के 120 से अधिक ब्रांडेड वॉल्व ट्यूब रेडियो मौजूद हैं। जो वर्ष 1940 से 1980 के साल में बने थे और काफी प्रचलित थे। आज इन्हें देखना मुश्किल है।

यूनेस्को ने वर्ष 2011 से हर साल 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की और वर्ष 2017 में अहमदाबाद को भारत की पहली विश्व हेरिटेज सिटी घोषित किया गया। शौक के चलते उनके पास मौजूद रेडियो के दुर्लभ कलक्शन को शहर व विश्व की सांस्कृतिक विरासत के रूप में आमजन के लिए खोलने के उद्देश्य से रेडियो म्यूज़ियम शुरू किया है।

नहीं देनी पड़ेगी फीस, कार्यशाला की भी योजना

पटेल ने बताया कि अहमदाबाद का यह पहला रेडियो संग्रहालय है। इसमें रखे रेडियो को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। आकाशवाणी के पूर्व सहायक निदेशक मौलिन मुंशी ने 12 फरवरी को इसका उद्घाटन किया। जल्द ही इसे लोगों के लिए खोला जाएगा। एक रेडियो वर्कशॉप भी शुरू करने की योजना है, जहां छात्र रेडियो की तकनीक, उसके इतिहास और उसके रखरखाव, संरक्षण के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

रेडियो की विकास यात्रा, स्वरूप से रूबरू होंगे युवा

संग्रहालय में लोहे की बॉडी वाले बड़े आकार के वॉल्व ट्यूब रेडियो से लेकर छोटे ट्रांजिस्टर तक रेडियो के विकास, तकनीक की यात्रा से यह म्यूज़ियम रूबरू कराएगा। हर रेडियो का इतिहास, उसे बनाने वाली कंपनी, निर्माण वर्ष की जानकारी अंकित है। यहां 1946 में इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में बना विन्टेज रेडियो, 1948 में ग्रेट ब्रिटेन में निर्मित मार्कोनी कंपनी का रेडियो, 1949 में नीदरलैंड में बना फिलिप्स कंपनी का रेडियो, 1950 में भारत में मर्फी कंपनी की ओर से बना रेडियो देखने को मिलेगा। ग्रामोफोन, स्पूल, रेडियो तीनों सुविधा वाला दुर्लभ रेडियो भी यहां देखने को मिलेगा, जो जर्मनी में 1963-64 में ग्रुंडिंग कंपनी की ओर से बनाया गया है।

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लव सोनकर

लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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