AI-generated Summary, Reviewed by Patrika
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Ahmedabad. अन्ननली की जन्मजात गंभीर खामी यानी ईसॉफेजियल एट्रेशिया जैसी दुर्लभ समस्या से पीडि़त पांच वर्ष की बालिका का जटिल आपरेशन कर सिविल अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने उसे पीड़ा मुक्त किया है। यह बीमारी लगभग हर 4000 बच्चों में किसी एक में पाई जाती है। देश में हर साल करीब 18 हजार नवजात इस तरह की खामी के साथ जन्म लेते हैं।ऐसी ही स्थिति से जूझ रही बालिका को अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने गेस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी के जरिए जीवन की सबसे अहम खुशी दी। उसके चलते पहली बार उसने मुंह से भोजन का स्वाद चखा।
खेडा जिले की इस बालिका को जन्म से ही अन्ननली नहीं थी। पांच वर्षों तक उसे ट्यूब के जरिए भोजन दिया जाता था, जो माता-पिता के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। शरीर में खून की कमी और बार-बार होने वाली बीमारियों के कारण सर्जरी टालनी पड़ी। अंततः जब स्वास्थ्य में सुधार हुआ तो सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने गेस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी करने का निर्णय लिया। गत 17 दिसंबर 2025 को विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश जोशी, डॉ. जयश्री रामजी, डॉ. सीमा (एनेस्थीसिया विभाग) और टीम ने यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की। सर्जरी के बाद बालिका ने पहली बार मुंह से भोजन लिया। बालिका को मुंह से भोजन लेते उनके परिजनों के खुशी के आंसू छलक पड़े।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि वर्ष 2025 में अस्पताल ने ऐसी तीन सर्जरी कर तीन बच्चों को नया जीवन दिया। निजी अस्पतालों में इस सर्जरी का खर्च 4 से 5 लाख रुपए तक हो सकता है। जबकि सिविल अस्पताल में यह उपचार नि:शुल्क उपलब्ध है।
गेस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी में पेट को ऊपर खींचकर उससे नई अन्ननली बनाई जाती है। यह अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मिलकर काम करती है। सर्जरी के बाद बालिका की स्थिति सामान्य रही और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
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Published on:
04 Jan 2026 10:19 pm


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