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अलवर, Jun 05, 2026

अलवर: हवाला के 33.62 लाख रुपए के साथ 4 गिरफ्तार, गुजरात से जुड़ा है कनेक्शन

अलवर पुलिस ने अवैध पैसों के लेन-देन को लेकर एक बड़ी कार्रवाई की है। कोतवाली थाना पुलिस और क्यूआरटी टीम ने केशव नगर के एक मकान पर छापा मारकर हवाला कारोबार का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 33.62 लाख रुपए कैश के साथ गुजरात और अलवर के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

alwar hawala racket

इस मकान में चल रहा था हवाला का कारोबार (फोटो - पत्रिका)

अलवर पुलिस को अवैध तरीके से एक राज्य से दूसरे राज्य में मोटी रकम भेजने वाले एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में कामयाबी मिली है। पुलिस ने इस गिरोह के कब्जे से 33 लाख 62 हजार 623 रुपए की नकदी बरामद की है। जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुधीर चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से तीन गुजरात के रहने वाले हैं और एक स्थानीय कारोबारी है।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान मनभाई (59) निवासी मेहसाणा (गुजरात), चतरू भाई (62) और उनके बेटे भौतिक (30) निवासी पाटन (गुजरात) के रूप में हुई है। इनके साथ ही अलवर शहर के होली ऊपर क्षेत्र के रहने वाले कमल गुप्ता (41) को भी पुलिस ने दबोचा है।

मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने मारा छापा

पुलिस को मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क अलग-अलग राज्यों के बीच हवाला की राशि ट्रांसफर करने का काम धड़ल्ले से कर रहा था। 3 मई को पुलिस टीम जब इलाके में गश्त पर थी, तभी मुखबिर से एक पुख्ता इनपुट मिला। सूचना थी कि केशव नगर के एक मकान में कुछ लोग मोटी रकम के साथ हवाला का धंधा कर रहे हैं।

प्रशिक्षु आईपीएस कार्तिकेय वर्मा और कोतवाली थाना प्रभारी रमेश के नेतृत्व में क्यूआरटी के जवानों ने मकान की घेराबंदी की। जब पुलिस अंदर पहुंची, तो पिछले कमरे में चार लोग बैग में कैश भरकर बैठे हुए थे। सख्ती से पूछताछ करने पर उन्होंने माना कि यह पैसा हवाला का है।

1 और 2 रुपए के नोटों से खुलता था 'कोडवर्ड' का खेल

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात पुलिस की छापेमारी के दौरान सामने आई। पुलिस को कमरे की एक दराज से दो रुपए के 61 नोट और एक रुपए का एक नोट मिला। जब पुलिस ने इनसे इस बारे में पूछा, तो उन्होंने हवाला के खेल का एक बड़ा राज खोला। आरोपियों ने बताया कि वे इन मामूली नोटों का इस्तेमाल पहचान और कोडवर्ड के रूप में करते थे। रकम भेजने वाले और उसे हासिल करने वाले के बीच इन नोटों के सीरियल नंबर को ही असली पहचान (वेरिफिकेशन कोड) माना जाता था।

आयकर विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट

पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी नकदी को जब्त कर लिया है। इस अवैध काली कमाई के तार कहां-कहां जुड़े हैं, इसकी गहराई से जांच के लिए आयकर विभाग (Income Tax Department) को भी लेटर लिखकर पूरी सूचना दे दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अलवर में इस गैंग के संपर्क में और कौन-कौन से व्यापारी थे।

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