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Rajasthan Farmers: बदला खेती का गणित, किसानों ने इन 5 फसलों से मुंह मोड़ा; जानिए क्यों

यदि जलवायु परिवर्तन के अनुरूप बीज, सिंचाई तकनीक और फसल विविधिकरण पर समय रहते काम नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में जिले से और भी कई पारंपरिक फसलें प्रभावित हो सकती हैं।

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Photo- Ai Generated


अलवर। जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर खेती-बाड़ी पर पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के अनियमित पैटर्न, तापमान में बढ़ोतरी, मिट्टी की उर्वरता में गिरावट और भूजल की गुणवत्ता बिगड़ने से अलवर जिले का कृषि स्वरूप तेजी से बदल रहा है

अलवर जिले में अरहर, मूंग, उड़द, धनिया और ग्वार की फसलें खेतों से गायब हो रही हैं। अरहर, मूंग, उड़द और धनिया का रकबा शून्य के करीब पहुंच गया है। हालांकि कृषि विभाग के आंकड़ों में इन फसलों का रकबा अब भी दर्शाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। किसान इन फसलों से पूरी तरह मुंह मोड़ चुके हैं।

बुवाई के बाद भी नहीं हो रही पैदावार

विशेषज्ञों के मुताबिक अरहर, मूंग और उड़द की बुवाई के बाद भी पौधे ठीक से विकसित नहीं हो पा रहे हैं। कहीं बारिश समय पर नहीं होती, तो कहीं अत्यधिक तापमान फसल को झुलसा देता है। धनिया का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।

बढ़ती लागत और घटती पैदावार की वजह से किसानों ने इन फसलों की पैदावार बंद कर दी है और इनकी जगह पर दूसरी फसलों को बढ़ाया दिया जा रहा है। वहीं, चने का रकबा भी एक हजार हेक्टेयर तक सिमट कर रह गया है।

प्याज और कपास बने नई पसंद

किसानों का रुझान नगदी फसलों की ओर बढ़ा है। अरहर, मूंग, उड़द और धनिया की बुवाई छोड़कर प्याज और कपास की फसल नई पसंद बनती जा रही है। हर साल प्याज का रकबा बढ़ता जा रहा है। अलवर में प्याज की अच्छी पैदावार होती है। यहां की जमीन भी प्याज की उपज के लिए अच्छी मानी जा रही है।

सरसों का रकबा बढ़ा

कम लागत और अपेक्षाकृत स्थिर उत्पादन के चलते सरसों किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है। इस सीजन में जिलेभर में एक लाख 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई की गई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। इसके साथ ही सब्जी उत्पादन में भी तेजी आई है। नगदी फसलों से बेहतर मुनाफा मिलने के कारण किसान सब्जियों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

एक्सपर्ट व्यू

यदि जलवायु परिवर्तन के अनुरूप बीज, सिंचाई तकनीक और फसल विविधिकरण पर समय रहते काम नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में जिले से और भी कई पारंपरिक फसलें प्रभावित हो सकती हैं। अलवर में पानी की गुणवत्ता अच्छी नहीं होने, बारिश में बदलाव और जमीन में पोषक तत्वों का असंतुलन की वजह से अरहर, मूंग, उड़द, धनिया और ग्वार का उत्पादन घटा है।

  • डॉ. अरविंद सिंह, सहायक निदेशक, कृषि सांख्यिकी विभाग, अलवर

10 साल पहले मंडी में अरहर, मूंग, उड़द, धनिया और ग्वार की खूब आवक होती थी, लेकिन अब मंडी में इनकी आवक शून्य है। कभी-कभी ग्वार के कुछ कट्टे जरूर आ जाते हैं।

  • सत्य विजय गुप्ता, अध्यक्ष, कृषि उपज मंडी, अलवर