
चौपाल पर चुनावी चर्चा करते ग्रामीण। फोटो: पत्रिका
खैरथल। आगामी ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर खैरथल-तिजारा जिले के ग्रामीण अंचलों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। गांव-गांव में चुनावी चौपालें लगने लगी हैं और सरपंच पद के संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। इस बार चुनावी माहौल में सबसे खास भूमिका युवाओं की नजर आ रही है, जो नेतृत्व को लेकर खुलकर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
पंचायत चुनाव कार्यक्रम और आरक्षण लॉटरी की घोषणा से पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों में बैठकों और अनौपचारिक संवादों के माध्यम से उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया जा रहा है। साफ छवि, सरल व्यवहार, सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव और सहज व्यक्तित्व को सरपंच पद के लिए अहम माना जा रहा है। युवाओं का कहना है कि पंचायत को ऐसे प्रतिनिधि की जरूरत है, जो केवल औपचारिक दायित्वों तक सीमित न रहे, बल्कि विकास कार्यों को धरातल पर उतार सके।
ग्रामीण चौपालों में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क निर्माण, नालियों की व्यवस्था, स्वच्छता, रोजगार के अवसर और किसानों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत का नेतृत्व ऐसा हो, जिसकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत हो और जो योजनाओं को लेकर स्पष्ट सोच रखता हो।
युवाओं ने यह भी स्पष्ट किया कि अब पंचायत की राजनीति केवल प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। नेतृत्व ऐसा हो जो बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों को साथ लेकर चले और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाए।
चौपालों में यह रणनीति भी बन रही है कि घर-घर जाकर मतदाताओं से सीधा संवाद किया जाए, उनकी समस्याओं को समझा जाए और अधिक से अधिक मतदान के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए।
युवाओं का मानना है कि पंचायत की तस्वीर बदलने की असली ताकत उनके हाथों में है। यही कारण है कि इस बार पंचायत चुनावों को केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित ग्राम पंचायत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लेकर उत्साह और जागरूकता का माहौल साफ नजर आ रहा है।
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Published on:
26 Jan 2026 01:49 pm
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