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अंबिकापुर. ग्रामीण गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) (BIHAN Yojana) संचालित किया जा रहा है, लेकिन जिले में यह योजना महिलाओं को सशक्त करने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। आरोप है कि योजना से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी मालामाल हो रहे हैं, जबकि दोषियों पर कार्रवाई के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है।
ऐसा ही एक गंभीर मामला जनपद पंचायत अंबिकापुर में सामने आया है, जहां योजना (BIHAN Yojana) के तहत कार्यरत एक पीआरपी ने ग्राम संगठन के बैंक खाते से 21.40 लाख रुपये गुपचुप तरीके से आहरित कर लिए। हैरानी की बात यह है कि जांच में गबन की पुष्टि होने के बावजूद ढाई साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न एफआईआर दर्ज हुई और न ही कोई सख्त कार्रवाई।
शिकायत के अनुसार सरगुजा जिले के विकासखंड अंबिकापुर अंतर्गत वनदेवी आजीविका संगठन, मेंड्राकला में पदस्थ पीआरपी जशवंती एक्का द्वारा लगभग 21.40 लाख रुपये की हेराफेरी की गई। गबन के मामले में गठित जांच समिति ने वित्तीय अनियमितता (BIHAN Yojana) को स्पष्ट रूप से प्रमाणित पाया, बावजूद इसके संबंधित महिला कर्मचारी आज भी विभाग से जुड़ी हुई है।
जनपद पंचायत अंबिकापुर के विकासखंड परियोजना प्रबंधक ने मई 2022 में पीआरपी जशवंती एक्का को वित्तीय अनियमितता और कार्य में लापरवाही के आरोप में नोटिस (BIHAN Yojana) जारी किया था। नोटिस में उल्लेख है कि इंदिरा गांधी ग्राम संगठन केराकछार के खाते से 21.40 लाख रुपये व्यक्तिगत रूप से आहरित किए गए, जो संगठन के नियमों के विरुद्ध है और पद के दुरुपयोग का गंभीर मामला है।
नोटिस में 10 दिवस के भीतर चार किस्तों में राशि जमा करने के निर्देश दिए गए थे, अन्यथा कठोर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन आज तक न राशि जमा हुई और न ही दंडात्मक कार्रवाई।
्शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नियमानुसार पीआरपी की पदस्थापना (BIHAN Yojana) निवास स्थान से दूर की जानी चाहिए, लेकिन जशवंती एक्का को उनके निवास क्षेत्र में ही पदस्थ किया गया। इसे अधिकारियों द्वारा नियमों की खुली अनदेखी बताया गया है।
सूत्रों के अनुसार गबन में संलिप्त कर्मचारी (BIHAN Yojana) को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते न तो विभागीय कार्रवाई हो सकी और न ही कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। यह भी आशंका जताई जा रही है कि कार्रवाई में देरी से गबन की राशि और बढ़ सकती है।
शासकीय राशि के गबन के बावजूद पीआरपी जशवंती एक्का (BIHAN Yojana) अब भी कार्यरत है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि महिला का वेतन रोक दिया गया है, लेकिन बिना वेतन के उससे कार्य कराया जा रहा है, जो अपने आप में सवाल खड़े करता है।
मामले में पक्ष जानने के लिए पत्रिका ने जनपद पंचायत सीईओ राजेश सेंगर से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि जांच जिला पंचायत कार्यालय द्वारा की जा रही है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई (BIHAN Yojana) की जाएगी। वहीं जिला पंचायत सीईओ विनय अग्रवाल ने बताया कि गबन की राशि की रिकवरी की जा रही है और वेतन रोका गया है। एफआईआर को लेकर उनका कहना था कि पहले रिकवरी जरूरी है, उसके बाद सेवा समाप्त कर एफआईआर कराई जाएगी।
इसी तरह का एक बड़ा मामला (BIHAN Yojana) दूध सागर समिति का भी सामने आ चुका है, जहां समिति के सीईओ और संचालक द्वारा 3 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी की गई थी।
लुण्ड्रा क्षेत्र की महिलाओं की शिकायत पर जांच सही पाए जाने के बाद अप्रैल 2025 में डेयरी फार्म सील कर दिया गया था और एफआईआर के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आज तक मामला दर्ज नहीं हो सका। जब इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे जिला पंचायत से जुड़ा मामला नहीं बताते हुए जिम्मेदारी टाल दी।
Published on:
03 Feb 2026 08:04 pm
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