Mother Funeral Son: महिला के पति की पहले ही हो चुकी थी मौत, बेटा ही था एकमात्र सहारा, हैपेटाइटिस बी बीमारी से इलाज के दौरान तोड़ दिया दम, आर्थिक रूप से कमजोर महिला का संस्था बनी सहारा
अंबिकापुर. शहर के शंकर घाट स्थित मुक्तिधाम में शुक्रवार को एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं होने के कारण एक मां ने अपने 23 वर्षीय बेटे को मुखाग्नि (Mother Funeral Son) दी। महिला के पति की पहले ही मौत हो चुकी है। बेटा ही एकमात्र सहारा था। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर महिला के दुख की इस घड़ी में सामाजिक संस्था अनोखी सोच उसके साथ खड़ी नजर आई और अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था कराई। बता दें कि अनोखी सोच संस्था इससे पूर्व भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की अंतिम संस्कार में मदद कर चुकी है। वहीं लावारिस लाशों को भी उन्होंने ससम्मान अंतिम संस्कार किया है।
शहर के केनाबांध निवासी 23 वर्षीय राहुल गुप्ता हेपेटाइटिस-बी से पीडि़त था और उसका उपचार मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था। गुरुवार की रात उपचार के दौरान उनकी मौत (Young son died) हो गई। राहुल के पिता का पहले ही निधन हो चुका था और परिवार में उसकी वृद्ध मां ही एकमात्र सहारा थी।
आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना परिवार के लिए मुश्किल हो गया था। मामले की जानकारी मिलने पर परिजनों ने अनोखी सोच संस्था (Anokhi Soch Sanstha) से संपर्क किया। संस्था के अध्यक्ष सूर्यप्रकाश साहू और सदस्यों ने तत्काल सहयोग करते हुए अंतिम संस्कार की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कराईं।
संस्था के सदस्यों ने पीएम हाउस से युवक का शव ससम्मान वाहन से लेकर शंकरघाट स्थित मुक्तिधाम पहुंचे। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ राहुल का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
जवान बेटे की मौत से मां पूरी तरह से टूट चुकी थी, उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि बेटे का वह अंतिम संस्कार कर सके। अंतिम संस्कार (Funeral of son) के दौरान भावुक दृश्य तब सामने आया, जब परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं होने के कारण राहुल की मां ने स्वयं अपने पुत्र को मुखाग्नि दी।
यह दृश्य देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। संस्था के सदस्यों ने शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिया। इस दौरान संस्था के कई सदस्य उपस्थित रहे।