Mobile Addiction Affecting Children's Eyesight: जिला अस्पताल के नेत्र विभाग की ओपीडी में आंखों की समस्या को लेकर रोज पहुंच रहे 30 फीसदी बच्चे, विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों को आंखों को नुकसान पहुंचा रहा मोबाइल।
Children Eye Problems: बालाघाट जिले में वैसे तो इन दिनों बच्चों के हाथों में मोबाइल आम बात है, लेकिन गर्मी की छुट्टियों में इसका अत्यधिक उपयोग बच्चे कर रहे हैं। यह उनकी आंखों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग की ओपीडी के आकड़े कुछ ऐसे ही कहानी बयां कर रहे हैं। नेत्र विभाग के आकड़े पर गौर करें तो प्रतिदिन औसतन करीब 80 मरीज आ रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या करीब 30 फीसदी है। वे आंखों से संबंधित विभिन्न समस्याओं से पीडि़त हैं। इसका सबसे बड़ा कारण दिनभर घर में रहकर मोबाइल पर गेम खेलना व कार्टून देखने में अपना समय बिताना है। इससे उनकी आंखों पर दबाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की माने तो इससे बच्चों को नुकसान हो रहा है। इससे बचाने उनकी सोशल एक्टिविटी बढानी होगी। बाहर घूमाने के साथ उनकी रूचि के अनुसार अलग-अलग खेल खेलने के लिए प्रेरित करना होगा। इससे वे मोबाइल का उपयोग कम करेंगे। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में बच्चों को गंभीर नेत्र संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इन दिनों कुछ स्कूल प्रबंधन बच्चों की छुट्टी के दिनों में होमवर्क उनके मोबाइल पर दे रहे हैं। इससे भी उनके मोबाइल का उपयोग बढ़ रहा है। इसकी वजह से कई बच्चे रात के समय अंधेरे में मोबाइल चलाते है तथा दिए गए प्रोजेक्ट को इंटरनेट के माध्यम से सर्च करते हैं। शहर के भटेरा चौकी निवासी राधिका पवार ने बताया कि पहले बच्चों की कॉपी पर होमवर्क मिलता था। अब उनको मोबाइल पर होमवर्क दिया जाता है। इससे बच्चे अधिक समय तक मोबाइल का उपयोग करते हैं। इसके अलावा उनको जब भी मौका मिलता है वे मोबाइल लेकर कार्टून देखना शुरू कर देते हैं। समझाने के बाद भी बच्चे नहीं समझते हैं।
इन दिनों मोबाइल के उपयोग से बच्चों की आंखों में समस्याएं बढ़ रही है। उनको जल्दी चश्मा लग रहा है। हेडक सहित साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम सामने आ रहे हैं। बच्चा सोशल नहीं हो पा रहा है। यह चिंताजनक है। नेत्र विभाग की कुल ओपीडी में बच्चों की संख्या करीब 30 फीसदी है। माता-पिता बच्चों को मोबाइल व टीवी से हटाकर बाहरी गतिविधियों में उनको व्यस्त रखे। परिवार के सदस्य उनके साथ खेले। मेहल्ले के दूसरों बच्चों से उनकी दोस्ती कराएं ताकि वे उनके साथ कुछ समय खेल सकें।
- डॉ. उन्नति पिछोड़े, नेत्र रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल बालाघाट।