# भिवाड़ी

तीन साल बायपास से लेकर भिवाड़ी मोड जलभराव से व्यापार दूभर

करीब तीन साल से उद्योग नगरी और जलभराव शब्द एक दूसरे के पर्याय बन गए हैं। अगस्त 2023 में रैंप निर्मित होने के बाद शुरू हुआ जलभराव का सिलसिला बारिश के अलावा सर्दी और गर्मी में भी पीछे नहीं छोड़ रहा है। जलभराव की वजह से हजारों दुकानदारों का करोड़ों रुपए का व्यवसाय ठप्प हुआ है।

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जल निकासी का इस बार बारिश से पहले भी नहीं कोई इंतजाम

भिवाड़ी. करीब तीन साल से उद्योग नगरी और जलभराव शब्द एक दूसरे के पर्याय बन गए हैं। अगस्त 2023 में रैंप निर्मित होने के बाद शुरू हुआ जलभराव का सिलसिला बारिश के अलावा सर्दी और गर्मी में भी पीछे नहीं छोड़ रहा है। जलभराव की वजह से हजारों दुकानदारों का करोड़ों रुपए का व्यवसाय ठप्प हुआ है। इसमें भिवाड़ी के साथ धारूहेड़ा के व्यापारी भी शामिल हैं। बायपास, भगत ङ्क्षसह कॉलोनी, भिवाड़ी मोड, समतल चौक और सेंट्रल मार्केट ऐसे पांच स्थान हैं जो कि बारिश के बाद जलभराव से जूझते हैं। बीते कई वर्ष से यहां जलभराव की समस्या बनी हुई है। बारिश के मौसम में सडक़ों पर नाले बहते हैं। नाले और सडक़ पर अंतर करना मुश्किल होता है। जलभराव की समस्या को दूर करने प्रशासन तमाम दावे करता है लेकिन सभी विफल साबित हो रहे हैं। 15 मई को 34 एमएलडी के एसटीपी का शुभारंभ किया गया था, तब से अब तक 20 में से 15 दिन बायपास के जलभराव में ही बीते हैं। एसटीपी का शुभारंभ होने के बाद भी हरियाणा ने नेशनल हाईवे से रैंप नहीं हटाया है। बारिश के पानी को साहबी नदी में ले जाने के लिए डे्रनेज की डीपीआर तैयार हो रही है। वहीं एसटीपी से शोधित पानी को ले जाने की लाइन के टेंडर हो चुके हैं, कार्यादेश से पहले लाइन के जिस हिस्से का अलाइनमेंट बदला है, उसकी स्वीकृति होनी है।

चार से पांच फीट तक भरता है पानी
भिवाड़ी बायपास पर धारूहेड़ा तिराहे के आसपास चार से पांच फीट पानी भर जाता है। भगत ङ्क्षसह कॉलोनी की मुख्य सडक़ों पर भी इतना पानी भर जाता है। यहां पर दर्जनों की संख्या में व्यावसायिक कॉम्पलेक्स, बैंक, रेस्टोरेंट, होटल, अस्पताल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। जलभराव होने से इनका व्यापार ठप्प हो जाता है। दुकानों के अंदर पानी घुस जाता है। इसी तरह भिवाड़ी मोड पर सीवर ओवरफ्लो की समस्या बारिश में विकराल हो जाती है। मेनहॉल को खोलना पड़ता है, जिसके बाद बारिश और सीवर का पानी सडक़ पर बहता है। समतल चौक पर फिलहाल सडक़ सीसी निर्माण का काम चल रहा है, सीसी निर्माण से कितनी मदद मिली, यह बारिश में ही पता चल सकेगा। इसके साथ ही सेंट्रल मार्केट के पीछे आवासन मंडल की गलियों और मुख्य सडक़ से सेक्टर में जाने वाली सडक़ पर जलभराव से हालात खराब हो जाते हैं।

व्यापारियों ने किया पलायन
बायपास पर जलभराव की वजह से सैकड़ों व्यापारियों ने पलायन किया है। जिन्हें उम्मीद है कि जल निकासी का उचित इंतजाम होगा, उनका व्यापार तीन साल में चौपट हो चुका है। दुकानों का किराया निकालना मुश्किल हो रहा है। मोबाइल शॉप संचालक अंकुर तायल ने बताया कि उनकी भगत ङ्क्षसह कॉलोनी में दुकान थी। जलभराव होने से उन्हें तावडू में दुकान खोलनी पड़ी। जलभराव की इस विकराल समस्या से स्थानीय जनों के साथ वाहन चालक भी बहुत परेशान होते हैं। बाहर से आने वाले वाहन चालक जलभराव में फंस जाते हैं।

भगत ङ्क्षसह कॉलोनी के निवासी दुखी
भगत ङ्क्षसह कॉलोनी को भिवाड़ी का सबसे पॉश क्षेत्र माना जाता है लेकिन जब से जलभराव शुरू हुआ है, यहां के निवासी बहुत दुखी हैं। बारिश के अलावा अन्य मौसम में भी होने वाले जलभराव से इनके घर टापू बन जाते हैं। घर आने और घर से बाहर जाने में नदी नालों को पार करने जैसा महसूस करते हैं। इसके साथ ही लगातार पानी भरे रहने से इमारतों को खतरा भी बढ़ता जा रहा है। जलभराव होने पर कई फीट तक पानी घर और दुकानों के चारों तरफ भर जाता है।