MP BJP Guidelines- राजनीतिक नियुक्ति पाने वाले अध्यक्ष-उपाध्यक्षों के लिए सत्ता-संगठन की नई गाइडलाइन, हर 6 माह में देनी होगी परफॉर्मेंस रिपोर्ट, ज्यादा शिकायत पर नपेंगे सीएम की मंशा के आधार पर पहली बार तय की गई गाइडलाइन, सख्ती से पालन करने के निर्देश
MP Government Guidelines- हरिचरण यादव भोपाल, मध्यप्रदेश में हाल में राजनीतिक नियुक्तियां पाने वाले अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को हर 6 महीने में परफार्मेंस रिपोर्ट देनी होगी। इसमें जनता के लिए किए गए व आगे किए जाने वाले कामों का विवरण होगा। नियुक्ति के बाद से संबंधित निगम मंडल, प्राधिकरण, बोर्ड और आयोग में किए गए सुधारों को बताना होगा। यही नहीं, जिनके खिलाफ ज्यादा और गंभीर शिकायतें मिलेंगी, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा पर सत्ता व संगठन ने ठोस सुधारों और जनता तक पकड़ बनाने के लिए पहली बार यह गाइडलाइन तय की है। गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर 3 बार समझाइश देंगे, अन्यथा बाहर कर देंगे। जल्द ही अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को अवगत भी करा दिया जाएगा।
30 से ज्यादा नियुक्तियां होल्ड:
सत्ता व संगठन ने 30 से ज्यादा निगम मंडल, प्राधिकरण, बोर्ड, परिषद व आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों को होल्ड कर दिया है। इन्हें रिजर्व रखा गया है, भविष्य में जरुरत के हिसाब से यहां पदाधिकारियों को मौका दिया जाएगा। ऐसे निगम-मंडल, प्राधिकरण, बोर्ड, परिषद व आयोगों में नीति एवं योजना आयोग, सामान्य निर्धन कल्याण आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग जैसे अन्य शामिल हैं।
ऐसा किया तो भी होंगे बाहर
फिजूलखर्ची करने वालों पर होगी नजर सत्ता-संगठन ने जो नई गाइडलाइन तय की है उसमें फिजूलखर्च बड़ा मुद्दा है। ऐसा करने वालों पर नजर रखी जा रही है। हालही में पीएम ने भी मितव्ययिता अपनाने को कहा था। इसी के अनुरूप नियमों से अलग जाकर खर्च करने और अनावश्यक खर्च से जुड़े कामों में दिलचस्पी रखने वालों पर नजर रखी जाएगी। ऐसे अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को अधिकतम तीन बार समझाइश दी जाएगी, नहीं माने तो बाहर किया जाएगा।
निगम मंडल, प्राधिकरण, आयोग, बोर्ड और परिषद, ये सभी जनता से सीधे जुड़े है, इसलिए प्रत्येक को जनता को सुनने के लिए तय प्लेटफार्म बनाना होगा। उसके तहत सुनवाई भी करनी होगी। संबंधित निगम मंडलों से जुड़ी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों पर शिकायत मिलने पर जवाबदेही तय होगी।
अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को सत्ता व संगठन से समन्वय बनाकर चलना होगा, इसमें कमी पाई जाने पर टोका जाएगा। गलती दोहराने या नहीं मानने पर पूछताछ होगी, संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो नपेंगे।
किसी भी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्यों के विवादित बयानों की कुंडली तैयार होगी। यदि ये जनता में किरकिरी कराने वाले होंगे तो सीधे कार्रवाई की जा सकती है। इसमें किसी भी तरह की माफी नहीं मिलेंगी। सत्ता व संगठन ने तय किया है कि गरिमा से हटकर कोई बयानबाजी नहीं करेंगे।
चूंकि मंत्री विभागों के मुखिया होते है इसलिए अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। ऐसे में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष मंत्रियों को विश्वास में लेकर ही आगे बढ़ेंगे। अंदरूनी कलह या खींचतान में होने वाले नुकसान को अनदेखा नहीं किया जाएगा। सीधे कार्रवाई के दायरे में लिया जाएगा।