Financial Goals: एक समय 1 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस पर्याप्त माना जाता था, लेकिन बढ़ती महंगाई, बड़े होम लोन और बढ़ती पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अब यह राशि कई परिवारों के लिए कम पड़ सकती है।
Term Insurance Cover: एक समय था जब 1 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस सुनते ही लगता था कि परिवार पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। महंगाई बढ़ी है, घरों की कीमतें बढ़ी हैं, बच्चों की पढ़ाई का खर्च बढ़ा है और लाइफस्टाइल भी पहले जैसी नहीं रही। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर परिवार का कमाने वाला सदस्य अचानक न रहे, तो क्या 1 करोड़ रुपये वास्तव में परिवार को लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा दे पाएंगे? जवाब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं है, लेकिन कई मामलों में यह रकम अब पहले जितनी बड़ी नहीं रह गई है।
मान लीजिए किसी परिवार का मासिक खर्च 1 लाख रुपये है। अगर 1 करोड़ रुपये की राशि को 7.5 फीसदी सालाना रिटर्न वाले निवेश में रखा जाए और हर महीने 1 लाख रुपये निकाले जाएं, तो यह पैसा लगभग 13 साल में खत्म हो सकता है। यानी परिवार के पास शुरुआती सुरक्षा तो होगी, लेकिन लंबे समय की आर्थिक जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो सकता है। यहीं से असली चिंता शुरू होती है।
आज अधिकांश शहरी परिवार किसी न किसी तरह के कर्ज से जुड़े हैं। होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन आम बात हो गई है। मान लीजिए किसी व्यक्ति पर 40 लाख रुपये का बकाया लोन है। ऐसी स्थिति में 1 करोड़ रुपये के बीमा कवर में से बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाएगा। इसके बाद परिवार के पास रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जरूरतों के लिए अपेक्षाकृत कम रकम बचेगी। ऐसे में आर्थिक सुरक्षा का दावा अधूरा रह सकता है।
इंश्योरेंस एक्सपर्ट्स के अनुसार केवल किसी तय आंकड़े को लक्ष्य बनाना सही तरीका नहीं है। सही कवर व्यक्ति की आय, कर्ज, पारिवारिक जिम्मेदारियों और भविष्य के लक्ष्यों पर निर्भर करता है। आमतौर पर सालाना आय के 10 से 15 गुना या कई मामलों में 20 गुना तक का कवर शुरुआती आधार माना जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर आपकी सालाना आय 10 लाख रुपये है, तो 1 करोड़ रुपये का कवर न्यूनतम स्तर माना जा सकता है। लेकिन बेहतर सुरक्षा के लिए 1.5 करोड़ रुपये या उससे अधिक का कवर ज्यादा उपयुक्त हो सकता है।
टर्म इंश्योरेंस चुनते समय केवल सैलरी को आधार बनाना पर्याप्त नहीं है। कुछ महत्वपूर्ण सवाल खुद से पूछने चाहिए:
इन सवालों के जवाब ही सही बीमा कवर तय करने में मदद करते हैं।
बीमा राशि जितनी जरूरी है, उतनी ही महत्वपूर्ण पॉलिसी की अवधि भी है। एक्सपर्ट मानते हैं कि अधिकांश लोगों को कम से कम 60 से 65 वर्ष की उम्र तक बीमा सुरक्षा बनाए रखनी चाहिए। आमतौर पर इसी उम्र तक व्यक्ति की बड़ी वित्तीय जिम्मेदारियां पूरी हो जाती हैं और रिटायरमेंट फंड भी तैयार हो जाता है। इसके अलावा क्रिटिकल इलनेस कवर और प्रीमियम वेवर जैसी अतिरिक्त सुविधाएं सुरक्षा को और मजबूत बना सकती हैं।
कई लोग सोचते हैं कि शादी या घर खरीदने के बाद ही बीमा लेना चाहिए। लेकिन वित्तीय सलाहकार इस सोच से सहमत नहीं हैं। असल में जिम्मेदारियां धीरे-धीरे बढ़ती हैं। आज भले ही किसी युवा पर ज्यादा बोझ न हो, लेकिन आने वाले वर्षों में शादी, बच्चों की पढ़ाई, माता-पिता की देखभाल और होम लोन जैसी जरूरतें सामने आती हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि कम उम्र में प्रीमियम काफी कम होता है। स्वस्थ और युवा अवस्था में खरीदी गई पॉलिसी लंबे समय तक कम लागत पर बड़ी सुरक्षा दे सकती है।
अच्छी बात यह है कि अब कई आधुनिक टर्म प्लान्स में बीमा कवर बढ़ाने की सुविधा भी मिलती है। शादी होने पर, बच्चे के जन्म पर या नया होम लोन लेने जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं के बाद पॉलिसीधारक अपना कवर बढ़ा सकते हैं। इससे हर बार नई पॉलिसी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और सुरक्षा बदलती जिम्मेदारियों के साथ तालमेल बिठाती रहती है।