Jamui Suicide Case: बिहार के जमुई में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर निवासी सतीश गुप्ता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सतीश ने सुसाइड नोट में बिहार पुलिस में तैनात एक महिला सिपाही पर प्यार में धोखा देने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।
Jamui Suicide Case: उत्तर प्रदेश के 22 वर्षीय युवक ने बिहार के जमुई जिले में एक किराए के मकान में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। मृतक की पहचान UP के कुशीनगर जिले के विजयपुर निवासी सतीश गुप्ता के रूप में हुई है। सतीश जमुई में किराए के कमरे में रह रहा था, जहां पुलिस को दो पन्नों का सुसाइड नोट मिला। इस नोट में सतीश ने बिहार पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल पर गंभीर आरोप लगाए।
जानकारी के मुताबिक, सतीश गुप्ता गोपालगंज में एक प्राइवेट कंपनी में सुपरवाइजर के तौर पर काम करता था और काम के सिलसिले में जमुई आया था। उसने 31 मई को जमुई में एक कमरा किराए पर लिया और उसी दिन फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। कमरा अंदर से बंद होने के कारण किसी को घटना का पता नहीं चला। 2 जून को जब बंद कमरे से तेज बदबू आने लगी, तो मकान मालिक और पड़ोसियों को कुछ गड़बड़ होने का शक हुआ। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ने पर पुलिस को सतीश का शव पंखे से लटका हुआ मिला।
घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और मृतक के परिवार को सूचना दी। सतीश का परिवार 3 जून को कुशीनगर से जमुई पहुंचा। इसके बाद, 4 जून को जब पुलिस और परिवार ने कमरे की अच्छी तरह तलाशी ली, तो उन्हें सतीश के बिस्तर के पास दो पन्नों का सुसाइड नोट मिला।
सुसाइड नोट के अनुसार, सतीश 2023 से गोपालगंज की रहने वाली नीलू महतो के साथ रिलेशनशिप में था। दोनों की मुलाकात गोपालगंज में काम करने के दौरान हुई थी और उनकी जान-पहचान धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। दोनों ने शादी करने और साथ जीवन बिताने का वादा किया था। उनके परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को उनके रिश्ते के बारे में अच्छी तरह पता था।
नीलू बिहार पुलिस की तैयारी कर रही थी और उस दौरान सतीश ने हर कदम पर उसका साथ दिया, उसे बहुत सम्मान दिया और हर तरह की आर्थिक और भावनात्मक मदद की। 2025 में नीलू की मेहनत रंग लाई और वह बिहार पुलिस में कॉन्स्टेबल के तौर पर भर्ती हो गई। सतीश ने अपने लेटर में लिखा कि नौकरी मिलने से पहले नीलू उससे बहुत प्यार करती थी, लेकिन खाकी वर्दी पहनते ही उसकी सोच और व्यवहार में बहुत बड़ा बदलाव आ गया। वह सतीश को नजरअंदाज करने लगी और उससे पीछा छुड़ाने के तरीके खोजने लगी।
अपने सुसाइड नोट में सतीश ने अपनी मौत के लिए पूरी तरह से महिला पुलिसकर्मी नीलू महतो को ज़िम्मेदार ठहराया। उसने लिखा कि नीलू ने उसे मानसिक रूप से इतना परेशान किया कि उसके पास अपनी जान देने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था। नीलू न सिर्फ उसे, बल्कि उसकी मां को भी गंदी-गंदी गालियां देती थी। सतीश का दावा था कि इस बदसलूकी की कॉल रिकॉर्डिंग अभी भी उसके मोबाइल फ़ोन में मौजूद हैं।
सुसाइड नोट में अपनी आखिरी बातचीत का जिक्र करते हुए युवक ने लिखा कि उसने नीलू को समझाने की बहुत कोशिश की थी। उसने उससे कहा था कि अगर वह मर गया, तो उसकी मां दुख से टूट जाएगी और जी नहीं पाएगी। इस पर महिला पुलिसकर्मी ने जवाब दिया, 'क्या तुम मेरे लिए मर भी नहीं सकते? अगर तुम मर जाओगे, तो मुझे बहुत खुशी होगी।' इस ताने और बार-बार मरने की बात कहे जाने से टूटकर सतीश ने अपनी जान दे दी।
इस घटना के बाद सतीश का परिवार गहरे सदमे और दुख में है और उसके रिश्तेदार बहुत दुखी हैं। दो पेज का सुसाइड नोट मिलने के बाद जमुई पुलिस आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी धाराओं के तहत मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने नोट जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। अधिकारियों का कहना है कि नोट में किए गए दावों और आरोपों की पुष्टि के लिए सतीश के मोबाइल फोन की चैट, कॉल डिटेल और रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।