Kannauj former BJP MP Subrata Pathak: कन्नौज से पूर्व भाजपा सांसद सुब्रत पाठक ने अखिलेश यादव और डिंपल यादव पर निशाना साधा है। पाठक ने एक्स पर लिखा कि क्या अखिलेश यादव जिला प्रशासन से डरते हैं? पूरी खबर पढ़िए...
Kannauj former BJP MP Subrata Pathak vs Akhilesh Yadav: कन्नौज के पूर्व भाजपा सांसद सुब्रत पाठक ने कहा कि डिंपल यादव यदि वास्तव में शंकराचार्य के लिए सम्मान के लिए चिंतित हैं तो उन्हें सबसे पहले उस घटना के लिए क्षमा मांगनी चाहिए थी, जब बनारस में अखिलेश यादव के कार्यकाल में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज और उनके शिष्यों को दौड़ा कर पीटा गया था, लाठियां बरसाई गई थी। जिसमें कई शिष्य घायल हो गए थे। कई को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सुब्रत पाठक ने कहा कि मुझे याद नहीं है कि उस घटना के लिए कभी अखिलेश यादव या डिंपल यादव ने सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी हो। दरअसल, अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा के दौरान सांसद डिंपल यादव ने कन्नौज की घटना के लिए माफी मांगी थी। इस पर सुब्रत पाठक ने पूछा कि आखिर कन्नौज में क्या हुआ? जिससे स्वामी जी का अपमान हो गया।
उत्तर प्रदेश के कन्नौज से पूर्व भाजपा सांसद सुब्रत पाठक ने एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा है कि यदि कन्नौज में किसी प्रकार की सुविधा या अप्रिय स्थिति उत्पन्न हुई है तो उसके लिए क्षमा मांगना उचित है, लेकिन यह भी सत्य है कि पूरे प्रकरण पर समाजवादी पार्टी राजनीति करने का प्रयास कर रही है।
सुब्रत पाठक ने लिखा कि यदि वास्तव में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज की चिंता थी तो अखिलेश यादव को स्वयं स्वागत के लिए क्यों नहीं आए, जबकि उनके संसदीय क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उन्होंने यह भी पूछा कि की स्वामी जी के रुकने के लिए या कोई अन्य सुविधा के लिए कोई डिमांड लेटर प्रशासन के पास भेजा गया था? यदि हां तो उसे सार्वजनिक करो।
सुब्रत पाठक ने कहा कि स्वामी जी के रुकने की जिम्मेदारी अखिलेश के उसी गुर्गे को दी गई थी जिसने अखिलेश यादव की उपस्थिति में सार्वजनिक मंच से उनके विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा और टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी दी थी। क्या केंद्र और प्रदेश में बीजेपी की सरकार होते हुए बीजेपी के संसद के विरुद्ध ऐसी परिभाषा का प्रयोग कोई कर सकता है? ऐसे में उसका यह कहना कि प्रशासनिक दबाव के कारण दूरी बनाई विश्वास योग्य नहीं है।
सुब्रत पाठक ने कटाक्ष किया कि क्या पूरे कन्नौज में ऐसा कोई समाजवादी कार्यकर्ता नहीं था जो स्वामी जी को आश्रय दे सके? क्या सफाई इतने डरपोक हैं कि संत को आश्रय नहीं दे सकते हैं? उन्होंने लिखा कि अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी कार्यालय में ही रुकवा सकते थे या किसी अन्य सहयोगियों के होटल में व्यवस्था कर सकते थे। लेकिन वह तो स्वागत के लिए नहीं आए। क्या अखिलेश यादव भी कन्नौज जिला प्रशासन से डर गए? जब इतने ही डरपोक हैं तो राजनीति क्यों करते हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले अपने गुर्गे से कार्यक्रम को आयोजित कराया। बाद में राजनीतिक कारणों से उसे निरस्त करवा दिया। जिससे कि कट्टरपंथी यदि वोटर खुश हो जाए और सनातनी वोटर भी भ्रमित रहे। उन्होंने एक बार फिर लिखा की क्षमा मांगनी हो तो सबसे पहले बनारस में हुई घटना के लिए क्षमा मांगे। अंत में उन्होंने लिखा कि कन्नौज में गाय तो बहुत दूर की बात है भैंस भी नहीं कटती है ना मानो तो कसाइयों से पूछ लो।