फिलहाल पुलिस पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार आरोपी दंपति को दिल्ली ला रही है। उनसे पूछताछ कर हत्या की पूरी साजिश, घटनाक्रम और संभावित अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की 42 वर्षीय असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ देबोस्मिता पॉल (Debosmita Paul) की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पूर्वी दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित फ्लैट में मृत मिलीं प्रोफेसर की हत्या किसी लूटपाट या अज्ञात हमलावर ने नहीं, बल्कि उनके किरायेदार दंपति ने की थी। पुलिस ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता से पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को दिल्ली लाया जा रहा है।
जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी करीब 1400 किलोमीटर का सफर तय कर दिल्ली पहुंचे, हत्या को अंजाम दिया और फिर वापस कोलकाता लौट गए। हत्या के पीछे पुश्तैनी संपत्ति को लेकर विवाद को मुख्य वजह बताया जा रहा है।
एमफिल और पीएचडी कर चुकी देबोस्मिता पॉल दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिवाजी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर थीं। वह वसुंधरा एन्क्लेव स्थित मॉड अपार्टमेंट में अपने फ्लैट में अकेली रहती थीं। वह 2022 से ही अपने पति से अलग रह रही थीं। उनके पति बेंगलुरु में रहते हैं।
पुलिस के अनुसार, प्रोफेसर के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे। दोनों हाथों की कलाई कटी हुई थी और शरीर पर कई जगह चोट के निशान मिले थे। शुरुआती जांच में ही साफ हो गया था कि हत्या से पहले मारपीट हुई थी।
घटना का खुलासा उस समय हुआ जब प्रोफेसर की बड़ी बहन उनसे मिलने 4 जून को फ्लैट पहुंचीं। दरवाजा अंदर से बंद था और फोन पर भी बात नहीं हो पा रही थी। इसलिए उन्होंने सोसायटी के सदस्यों को बुलाया और फिर फ्लैट का ताला तोड़ा गया। अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। प्रोफेसर मृत अवस्था में फर्श पर पड़ी थीं, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
पूर्वी दिल्ली के डीसीपी राजीव कुमार के मुताबिक, गिरफ्तार दंपति कोलकाता स्थित प्रोफेसर की पुश्तैनी संपत्ति में किराएदार के रूप में रह रहे थे। वह संपत्ति देबोस्मिता के नाना की थी। आरोपी लंबे समय से उस मकान में किराये पर रहते थे और कई वर्षों से उसे खरीदना चाहते थे। प्रोफेसर के माता-पिता और उनके दोनों भाई-बहन संपत्ति बेचने के पक्ष में थे क्योंकि पूरा परिवार अब दिल्ली में बस चुका था।
लेकिन देबोस्मिता पॉल इस पुश्तैनी संपत्ति को बेचने के खिलाफ थीं। पुलिस का कहना है कि आरोपी दंपति को लगता था कि वह उनके सपनों को पूरा नहीं होने देगी और सबसे बड़ी बाधा वही हैं। इसी वजह से उन्होंने देबोस्मिता की हत्या की साजिश रची।
जांच में पता चला है कि आरोपियों ने कई बार प्रोफेसर को संपत्ति बेचने के लिए मनाने की कोशिश की थी, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहीं। इसके बाद दंपति ने दिल्ली आकर हत्या करने की योजना बनाई। बुधवार को उन्होंने प्रोफेसर की हत्या की और उसी दिन कोलकाता वापस लौट गए।
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि आरोपी अपने छोटे बच्चे को भी लेकर दिल्ली आए थे। ताकि किसी को उन पर शक न हो।
दिल्ली पुलिस ने इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए कई स्तरों पर जांच की। सबसे पहले पुलिस ने यह देखा कि फ्लैट में जबरन प्रवेश के कोई निशान नहीं थे। इससे संदेह हुआ कि मृतका हमलावरों को जानती थीं और उन्होंने खुद दरवाजा खोला होगा।
पुलिस ने सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और करीब 200 लोगों को जांच के दायरे में लिया। इनमें से 13 संदिग्ध ऐसे मिले जिन्हें सोसाइटी के लोग पहचान नहीं पाए। बाद में 10 लोगों की पहचान कर ली गई, जबकि तीन संदिग्धों की तलाश जारी रही। इसी कड़ी को जोड़ते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।
जांच के दौरान पुलिस ने प्रोफेसर के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले। इसमें सामने आया कि वह मुख्य रूप से अपनी मां और बहन से बात करती थीं। इसके अलावा कॉलेज के कुछ चुनिंदा कर्मचारियों से ही उनका संपर्क था।
पुलिस ने इन सभी लोगों से पूछताछ की और उनके संपर्कों की सूची तैयार की। इसी दौरान हत्या की पूरी साजिश की परतें खुलती चली गईं। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने प्रोफेसर के अलग रह रहे पति से भी पूछताछ की। हालांकि जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस का फोकस कोलकाता के उस दंपति पर गया, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। आखिरकार दोनों को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, हत्या बुधवार दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे के बीच हुई। मृतका की आखिरी बातचीत दोपहर करीब 1 बजे अपनी मां से हुई थी। शाम 6 बजे जब घरेलू सहायिका फ्लैट पर पहुंची तो बार-बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अगले दिन बहन घर आई तो इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ।