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सोना खरीदारों और ज्वेलर्स के लिए बड़ी खबर, आज से बदल गया नियम, भारत सरकार ने कर दी बड़ी घोषणा

Advance Authorisation:भारत सरकार ने रुपये को मजबूती देने के लिए सोने के आयात पर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। नए डीजीएफटी नियमों के तहत अब एडवासं आथराइजेशन के जरिए कारोबारी अधिकतम 100 किलो सोना ही आयात कर सकेंगे।

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Gold-Silver Price (Photo Source - Patrika)

Advance Authorisation DGFT Notice: मोदी सरकार ने सोने के आयात मामले में कड़ा फैसला लिया है। भारत सरकार ने तुरंत प्रभाव से नई पाबंदियां लागू कर रुपये की गिरती कीमतों को थामने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एडवांस ऑथराइजेशन के जरिये सोने के आयात पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार रुपये को विदेशी मुद्रा बाजार में डिफेंड करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसी रणनीति के तहत देश में सोने के आयात की अधिकतम सीमा अब सिर्फ 100 किलोग्राम तय कर दी गई है।

आसान भाषा में समझें नए नियम

वाणिज्य भवन नई दिल्ली से जारी 14 मई 2026 के पब्लिक नोटिस (संख्या 11/2026-27) के अनुसार, जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर के लिए आयात नियमों में 5 बड़े और सख्त बदलाव किए गए हैं। अब कोई भी आयातक एडवांस ऑथराइजेशन के तहत एक बार में अधिकतम 100 किलोग्राम सोना ही विदेश से मंगवा सकेगा।

फैक्ट्री का फिजिकल वेरिफिकेशन

जो कारोबारी पहली बार सोने के आयात के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनके कारखाने (मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी) की क्षेत्रीय प्राधिकरण की ओर से अनिवार्य रूप से भौतिक जांच की जाएगी, ताकि फर्जीवाड़ा रोका जा सके। अगला आयात तभी मंजूर किया जाएगा, जब कारोबारी ने अपने पिछले आयात किए गए सोने से कम से कम 50 प्रतिशत निर्यात का लक्ष्य पूरा कर लिया हो।

हर 15 दिन में CA रिपोर्ट : आयात-निर्यात पर सीधी और कड़ी नजर

आयातकों को अब हर पखवाड़े (15 दिन में) एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से प्रमाणित रिपोर्ट सौंपनी होगी कि उन्होंने कितना सोना मंगाया और कितना निर्यात किया। स्थानीय अधिकारियों को अब हर महीने DGFT मुख्यालय को एक विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होगी, ताकि आयात-निर्यात पर सीधी और कड़ी नजर रखी जा सके।

सर्राफा बाजार और ज्वेलरी निर्यातकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस नए फैसले पर सर्राफा बाजार और ज्वेलरी निर्यातकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि इससे सिस्टम में जबरदस्त पारदर्शिता आएगी और सोने के नाम पर होने वाली हवाला या डमी कंपनियों की धांधली पूरी तरह रुकेगी। हालांकि, छोटे और मंझोले निर्यातकों का मानना है कि बार-बार सीए से रिपोर्ट बनवाने और कागजी कार्रवाई बढ़ने से शुरुआती दिनों में कारोबार की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।

भारतीय घरेलू बाजार में सोने की सप्लाई और कीमतों पर क्या असर

आने वाले दिनों में यह देखना बहुत अहम होगा कि इन कड़े नियमों का भारतीय घरेलू बाजार में सोने की सप्लाई और कीमतों पर क्या असर पड़ता है। अर्थशास्त्री अब इस बात का आकलन करेंगे कि क्या आगामी त्योहारी और शादी के सीजन में सोने के जेवरात की मेकिंग चार्ज या प्रीमियम में कोई बढ़ोतरी होगी। सरकार और रिजर्व बैंक मिल कर इस आयात नीति के प्रभावों की लगातार समीक्षा करेंगे।

भारतीय रुपये पर सीधे तौर पर दबाव पड़ता है

इस पूरी खबर का एक बड़ा पहलू विदेशी मुद्रा भंडार और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति से जुड़ा है। भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। हर साल भारी मात्रा में सोना आयात करने से देश का अरबों डॉलर बाहर जाता है, जिससे सीधे तौर पर भारतीय रुपये पर दबाव पड़ता है। इस 100 किलो वाली पाबंदी से गैर-जरूरी आयात पर लगाम लगेगी, डॉलर की निकासी घटेगी और अंततः भारतीय रुपया मजबूत होगा।


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