NEET पेपर लीक मामले के बाद NTA परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। AI की मदद से प्रश्नपत्र तैयार करने, अनुवाद करने और पेपर लीक की संभावनाओं को कम करने की नई व्यवस्था अगले साल से लागू हो सकती है।
NEET Exam Reforms: नीट पेपर लीक पर मचे बवाल के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पेपर बनाने की प्रक्रिया में बदलाव करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत आने वाले समय में पेपर बनाने वाले विषय विशेषज्ञ को ये भी पता नहीं होगा कि वह किस परीक्षा का पेपर बना रहा है? हजारों सवालों का एक स्टॉक तैयार किया जाएगा, जिसमें से एआई की मदद से पेपर तैयार किए जाएंगे। इतना ही नहीं पेपर का अनुवाद भी 85 प्रतिशत तक एआई से कराने की तैयारी है। एनटीए इन बदलावों को अगले साल से लागू करने पर विचार कर रहा है।
नीट पेपर लीक की जांच में सामने आया है कि पेपर बनाने की प्रक्रिया में शामिल लोग ही पेपर लीक करने में शामिल पाए गए हैं। ऐसे में एनटीए कोशिश कर रही है कि पेपर बनाने और अनुवाद में मानवीय हस्तक्षेप को कम करके तकनीक का सहारा लिया जाए। इसके चलते सवालों को एक बड़ा स्टॉक तैयार कर उससे पेपर बनाने की योजना पर विचार हो रहा है। जैसे दस हजार सवालों का एक स्टॉक तैयार कर लिया जाए। फिर उसमें से एआई की मदद से समान कठिनता वाले सवालों का संतुलन कर प्रश्न-पत्रों के सैट तैयार किए जाए। इससे जब सवाल तैयार होंगे तो सवाल तैयार करने वालों को भी पता नहीं होगा कि वे सवाल किस परीक्षा में इस्तेमाल हो सकते हैं। इसमें सभी प्रतियोगी या टेस्टिंग परीक्षा को रखा जा सकता है। ऐसा ही अनुवाद के मामले में भी किया जा सकता है। इसमें 85 प्रतिशत तक अनुवाद एआई के जरिए कराया जाएगा। इस दौरान विशेषज्ञ चेक करेंगे कि अनुवाद ठीक हुआ है या नहीं। इससे पेपर लीक की संभावना घटेगी। एनटीए महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि नए फैसलों से छात्रों के मूल्यांकन के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।
एनटीए ये भी विचार कर रहा है कि सभी अभ्यर्थियों को समान पेपर देने की बजाए अलग-अलग सवालों वाले पेपर दिए जाए। वहीं परीक्षा सामग्री को लीक होने से बचाने के लिए क्लाउड की बजाय सुरक्षित एयर-गैप्ड वातावरण का इस्तेमाल हो सकता है। इसके अतिरिक्त एआइ और डेटा एनालिटिक्स से परीक्षा टेलीमेट्री डेटा का अधिक सटीक आकलन हो सकता है।
संसदीय मंत्री किरन रिजीजू ने शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना राजनीतिक है। यदि मंत्री या उनके कर्मचारी द्वारा कोई धोखाधड़ी होती है तो वे जिम्मेदार होते हैं, लेकिन किसी स्वायत्त निकाय में गड़बड़ हो तो वह निकाय जिम्मेदार होता है। शिक्षा मंत्री गलती से भाग नहीं रहे हैं, बल्कि समस्या को सुलझाने के लिए कई कदम उठा चुके हैं।