धौलपुर. 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए इलिजिबिलटी टेस्ट यानी टीईटी पास करना अनिवार्य करने से जिले के लगभग 15 हजार शिक्षकों के सामने नौकरी जाने का खतरा खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के तहत शिक्षकों ने यह परीक्षा नहीं दी तो जहां उनका प्रमोशन रोक दिया दिया जाएगा तो नौकरी से भी हाथ धोना होगा।
धौलपुर. 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए इलिजिबिलटी टेस्ट यानी टीईटी पास करना अनिवार्य करने से जिले के लगभग 15 हजार शिक्षकों के सामने नौकरी जाने का खतरा खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के तहत शिक्षकों ने यह परीक्षा नहीं दी तो जहां उनका प्रमोशन रोक दिया दिया जाएगा तो नौकरी से भी हाथ धोना होगा। हालांकि इस परीक्षा से उन शिक्षकों को बाहर रखा गया है, जिनके रिटायरमेंट में केवल 5 वर्ष शेष हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केन्द्र सरकार के मामले में दिलचस्पी नहीं दिखाने से राज्य सहित जिले के हजारों शिक्षकों के सामने समस्या आन पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों के लिए टीचर इलिजिबिलटी टेस्ट ‘टीईटी’ पास करना अनिवार्य है। हालांकि कोर्ट ने इन शिक्षकों को थोड़ी राहत देते हुए टीईटी परीक्षा पास करने की समय सीमा को एक वर्ष बढ़ाते हुए 31 अगस्त 2027 से 31 अगस्त 2028 कर दी, साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा। तो वहीं सुप्रीम कोर्ट ने जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से कम का समय बचा है, उन्हें परीक्षा देने से छूट दी गई है, लेकिन प्रमोशन पाने के लिए उन्हें भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट करे फैसले पर पुर्नविचार
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षक और कई शिक्षक संगठनों में असंतोष देखा गया और अपने-अपने स्तर से इसका विरोध किया गया। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षा देने और राष्ट्र निर्माण में योगदान करने के बावजूद उन्हें अपनी सेवा जारी रखने के लिए पुन: पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जा रहा हे, जो उनके अनुभव और सम्मान के साथ अन्याय है। सुप्रीम कोर्ट को इस फैसले पर पुन: विचार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने की 65 याचिकाएं खारिज
टीईटी परीक्षा को अनिवार्य करने के बाद शिक्षकों में रोष देखा गया और अपना विरोध प्रकट करते हुए जहां केन्द्र सरकार के सामने अपना पक्ष रक्षा तो वहीं देश, राज्य और जिला से राजस्थान प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ ने सुप्रीम कोर्ट में आदेश के पुनर्विचार याचिकाएं भी दायर की गईं, जिनमें ‘पुराने अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त’ शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया।
सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश
देश की सर्वोच्च न्यायालय ने गत वर्ष सितंबर 2025 में टीईटी अनिवार्यता को लेकर फैसला दिया था। इस फैसले से जिले के सैकड़ों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। तो वहीं मामले में दोबारा कोर्ट के फैसले के बाद दावा किया जा रहा है कि कई शिक्षकों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। सुको ने अपने फैसले में कहा था कि कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए जिनकी नौकरी पांच वर्ष से ज्यादा बची है, दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। जिनकी नौकरी पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें भी अगर प्रोन्नति पानी है तो टीईटी पास करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला समझ से परे है। हमने सदा राष्ट्रनिर्माण में भूमिका निभाते हुए अपना दायित्व निभाया है। अब ऐसी स्थिति में टीईटी परीक्षा का हम जैसे शिक्षकों के लिए अनिवार्य करना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को फैसले पर पुन: विचार करना चाहिए।
-मनोज मीणा, अध्यक्ष राजस्थान प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ
शिक्षकों पर टीईटी परीक्षा को थोपा जा रहा है, जिससे शिक्षक अपने आपको असुरक्षा और मानसिक तनाव से घिरा महसूस कर रहा है। अन्य सरकारी सेवाओं में लंबे अनुभव वाले अधिकारियों को दोबारा अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए परीक्षा नहीं देनी पड़ती।
- बीपी पोषवाल, शिक्षक