Nithya Menen highlighted industry wide: नित्या मेनन ने महिलाओं के ऑब्जेक्टिफिकेशन की समस्या पर विचार शेयर किए हैं, जो केवल साउथ सिनेमा तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे फिल्म इंडस्ट्री का मुद्दा है।
Nithya Menen highlighted industry wide: बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में फीमेल एक्ट्रेसस को पर्दे पर दिखाने का तरीका एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गया है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'पेड्डी' में जान्हवी कपूर के किरदार को लेकर दर्शकों और क्रिटिक्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद एक्ट्रेस नित्या मेनन ने इस पूरे मसले पर खुलकर अपनी बात रखी।
नित्या मेनन ने वैरायटी इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि महिलाओं के ऑब्जेक्टिफिकेशन की समस्या केवल साउथ इंडियन सिनेमा की नहीं है, बल्कि ये पूरी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक आम चलन बन चुका है। उनके अनुसार इस समस्या की असल जड़ सिनेमा का अत्यधिक व्यावसायीकरण है, जहां दर्शकों को लुभाने के लिए जो भी फॉर्मूला काम करता है, उसे बार-बार यूज किया जाता है, चाहे वो कितना भी बेकार क्यों न हो।
बता दें, नित्या मेनन ने ये भी कहा कि ऐसे माहौल में स्टार्स को खुद तय करना होगा कि वे क्या करना चाहते हैं और क्या नहीं। उनका मानना है कि हर फीमेल स्टार्स को ये अधिकार है कि वो किसी भी ऐसे सीन के लिए मना कर सके जिसमें उसे असहज महसूस हो। उन्होंने ये भी माना कि ऐसे फैसले लेने से कुछ फिल्में और कुछ खास किस्म के किरदार मिलना बंद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं, क्योंकि उन्होंने शुरू से ही केवल स्टारडम के बजाय अपनी शर्तों पर काम करने को प्राथमिकता दी है।
साउथ स्टार राम चरण अभिनीत फिल्म 'पेड्डी' में जान्हवी कपूर ने अचियम्मा का किरदार निभाया। फिल्म की रिलीज के बाद दर्शकों के एक बड़े वर्ग ने आपत्ति जताई कि उनके किरदार का परिचय उनकी व्यक्तित्व और कथा में उनकी रोल की बजाय सिर्फ शारीरिक बनावट को केंद्र में रखकर कराया गया। इसके अलावा एक दृश्य को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ।
फिल्म के निर्देशक बुची बाबू सना ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि उनका कभी भी किसी महिला किरदार को छोटा दिखाने का इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत और पेशेवर, दोनों स्तरों पर महिलाओं का गहरा सम्मान करते हैं। साथ ही उन्होंने उन दर्शकों से माफी मांगी जिन्हें फिल्म के कुछ दृश्यों से ठेस पहुंची और घोषणा की कि आलोचना मिलने के बाद मेकर्स ने उन विवादित दृश्यों में बदलाव करने का फैसला किया है।
ये पूरा विवाद एक बड़े सवाल को जन्म देता है फिल्मों में महिलाओं की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? निर्देशक की, निर्माता की, एक्ट्रेस की या दर्शकों की? नित्या मेनन का नजरिया इस मामले में संतुलित और व्यावहारिक लगता है। वे न तो पूरी इंडस्ट्री को कटघरे में खड़ा करती हैं और न ही स्टार्स को पूरी तरह बेबस बताती हैं। उनका मानना है कि अगर कोई स्टार्स जानते-बूझते व्यावसायिक फॉर्मूले का हिस्सा बनता है, तो उसे उसके नतीजे भी स्वीकार करने होंगे और अगर उसे आपत्ति है, तो आवाज उठाने का हक हमेशा मौजूद है।