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खनन रोकने की नहीं, आस्था व संस्कृति को बचाने की लड़ाई

बालाघाट. जल, जंगल और जमीन को लेकर उकवा रेंज ऑफिस चौक पर गुरुवार को आदिवासी समाज ने प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चक्काजाम कर दिया। करीब चार घंटे तक जाम से सडक़ के दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। ग्राम लूद, हिर्री, कोंगेवानी, बम्हनी, हर्रानाला, घोंदी, लौगुर, पोला एवं अन्य वन ग्रामों से […]

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उकवा में चार घंटे चक्का जाम हजारों आदिवासी सडक़ पर - जल, जंगल और जमीन को बचाने की हुंकार

उकवा में चार घंटे चक्का जाम हजारों आदिवासी सडक़ पर - जल, जंगल और जमीन को बचाने की हुंकार

बालाघाट. जल, जंगल और जमीन को लेकर उकवा रेंज ऑफिस चौक पर गुरुवार को आदिवासी समाज ने प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चक्काजाम कर दिया। करीब चार घंटे तक जाम से सडक़ के दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। ग्राम लूद, हिर्री, कोंगेवानी, बम्हनी, हर्रानाला, घोंदी, लौगुर, पोला एवं अन्य वन ग्रामों से हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों के ‘ना लोकसभा ना विधानसभा सबसे ऊपर ग्राम सभा।’ ‘जो जमीन सरकारी है वह जमीन हमारी है।’ ‘जंगल हमारी माई है, बाघ हमारा भाई है।’ आदि नारे से उकवा चौक गुंजयमान हो गया।

बैहर विधायक संजय उईके ने कहा कि आज हम सभी पचामा दादर का खनन रोकने के लिए या पचामा की 60 हेक्टर जमीन को बचाने के लिए नहीं बल्कि हमारे देवी-देवता हमारी आस्था हमारी संस्कृति को बचाने के लिए सडक़ पर उतरे हैं। कहा कि लौगुर और पचमा दादर में 117+35+60+156 हेक्टर वन क्षेत्र बॉक्साइट खनन के लिए खोला गया है। खनन के लिए 150 एकड़ की रिपोर्ट ईआईए ्र ड्राफ्ट अंग्रेजी में बनाई गई है। ब्लॉक आवंटन कर दिए गए हैं मगर ग्रामसभा की सहमति नहीं ली गई है। ना ही ग्राम सभा से परामर्श लिया गया, जबकि वन क्षेत्र में पेसा एक्ट एवं वन अधिकार लागू है, जिसके लिए ग्राम सभा की सहमति जरूरी है।

जिला पंचायत सदस्य दलसिंह पंद्रे, जिला पंचायत सदस्य मंसाराम मड़ावी, हिरासन बाई उईके, नेहा सिंह, राजकुमार सिंह, सरपंच शिशुपाल तेकाम, द्रोपकिशोर मरावी, शिव उइके, हरे सिंह पंद्रे, धारा सिंह मर्सकोले, भगवती सैयाम, सुनील उइके आदि उपस्थित रहे।

बढ़ाई जाए जनसुनवाई की तिथि

वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन ग्रामीणों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के संयुक्त तत्वाधान में अपने संवैधानिक अधिकार जल, जंगल व जमीन एवं प्राकृतिक संसाधनों के लिए शासन प्रशासन की दोहरी नीति के विरुद्ध किया गया है। हमारे संवैधानिक अधिकार पेसा एक्ट 1996 नियम 2022 का नियम 27 के अनुसार वन क्षेत्र पचामा दादर बॉक्साइट ब्लॉक खनन की स्वीकृति व जनसुनवाई करने की तिथि बढ़ाई जाए। वैधानिक और संवैधानिक अधिकारों के अनुसार हमारे प्राकृतिक संसाधन विस्तार धार्मिक मान्यताओं जल, जंगल व जमीन का अधिकार ग्राम सभा को देना सुनिश्चित करने के बाद ग्रामसभा की पूर्ण सहमति से प्रस्तावित बॉक्साइट ब्लॉक खनन कार्रवाई प्रक्रिया लोक/जनसुनवाई की जाए। संविधान की पांचवीं अनुसूची अनुच्छेद 244 (1) के तहत अनुसूचित क्षेत्र में हो रहे वनों की विनाशकारी कटाई एवं खनिज उत्खनन पर प्रतिबंध लगाया जाए ताकि शुद्ध जल वायु पर्यावरण मृदासंरक्षण तथा जैव विविधता को बचाया जा सकें।

ग्राम लूद की जनसनुवाई का करेंगे विरोध

आंदोलन के दौरान 18 फरवरी को ग्राम लूद में होने वाली जनसुनवाई में वन क्षेत्र के ग्रामीणों ने नहीं जाने का निर्णय लिया। कहा कि अगर हमारी मांगे पूरी नहीं की जाती है तो जन आंदोलन उकवा के बाद दूसरा चरण बैहर एवं तीसरा चरण पैदल जाकर बालाघाट में किया जाएगा। इसके बाद भी हमारी मांगे पूरी नहीं की जाती है तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

राजद के कई बड़े नेता और तेजश्री यादव की पत्नी ने कहा था कि बिहार में खेल होना अभी बाकि है। ऐसा होने के डर से ही नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा के नजदीक चाणक्य होटल में रात को रुकवाया।

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लव सोनकर

लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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