
दंतेश्वरी मईया सहकारी शक्कर कारखाना में गन्ने की पेराई व शक्कर उत्पादन का कार्य दिसंबर से हो रहा है। अब कारखाना में पेराई के लिए पर्याप्त गन्ना उपलब्ध नहीं हो रहा है। पेराई एक दिन बंद करने के बाद शुक्रवार को पुन: पेराई शुरू की गई। किसानों से गन्ना मंगाकर कारखाना परिसर में डंप कराया जा रहा है। गन्ने की आवक कम होने से पेराई में परेशानी हो रही है। वहीं गन्ना बेचने वाले अधिकांश किसानों को राशि का अब तक भुगतान नहीं हुआ है।
कारखाना प्रबंधन की माने तो अभी तक 32 हजार 760 मीट्रिक टन गन्ने की खरीदी हो चुकी है। शक्कर का उत्पादन 31 हजार 830 क्विंटल किया गया है। कुछ वर्षों से जिले में गन्ना का उत्पादन कम हो रहा है, जिसका असर कारखाने पर पड़ रहा है। किसान गन्ना की खेती से मुंह मोड़ रहे हैं। कारखाना को चलाने के लिए गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है। हालांकि विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
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इस साल कारखाना प्रबंधन ने 65 हजार मीट्रिक टन गन्ना ेपेराई का लक्ष्य रखा है। अभी तक कुल 680 किसानों ने 31 हजार 909 मीट्रिक टन गन्ना कारखाने को बेचा है, जिसकी पेराई हो चुकी है। लक्ष्य पूरा करने के लिए लगभग 34 हजार मीट्रिक टन गन्ने की और आवश्यकता है। लक्ष्य को पूरा करने की चुनौती कारखाना प्रबंधन के सामने है। इस बार 4 हजार मीट्रिक टन गन्ना पड़ोसी जिला दुर्ग से आ जाए तो बड़ी बात है।
शक्कर कारखाना में अभी तक 680 किसान लगभग 10 करोड़ 77 लाख रुपए का गन्ना बेच चुके हैं। किसानों को मात्र 3 करोड़ 5 लाख रुपए का ही भुगतान हुआ है। अधिकांश किसानों को भुगतान नहीं किया गया है। कारखाना में उत्पादित शक्कर की बिक्री के भुगतान के बाद किसानों के खाते में राशि डाली जाएगी। यहां से उत्पादित शक्कर का वितरण पीडीएस हितग्राहियों को राशन दुकानों में दिया जाता है। जनवरी से किसानों को भुगतान नहीं किया गया है।
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गन्ना उत्पादक किसान राजेंद्र व संरक्षक छगन देशमुख ने कहा कि गन्ना उत्पादक किसानों के लिए भी शासन-प्रशासन को योजना बनानी चाहिए। जैसे खरीदी केंद्रों में धान बेचने के कुछ दिन बाद राशि किसानों के खाते में आ जाती है। वैसी ही सुविधा गन्ना किसानों के लिए भी हो। गन्ना बेचने के कुछ दिन बाद राशि उसके खाते में आ जाए।
गन्ना उत्पादक किसान संघ के संरक्षक छगन देशमुख ने कहा कि पांच साल से गन्ना का समर्थन मूल्य बढ़ा नहीं है। सिर्फ बोनस की राशि बढ़ रही है। उसका भी भुगतान समय पर नहीं होता है। सरकार व कारखाना प्रबंधन की कार्यप्रणाली समझ से परे है। ऐसे ही चलता रहा तो शक्कर कारखाना में संकट मंडराने लगेगा, क्योंकि गन्ना उत्पादक किसान नाराज हैं। समय रहते सरकार सुध ले।
गन्ने की खेती के फायदे कृषि विभाग एवं शक्कर कारखाना जरूर किसानों को बता रहे हैं। लेकिन किसानों का रुझान गन्ने में कम व धान में ज्यादा दिखाई दे रहा है। तीन साल पहले धान का रकबा जिलेभर में लगभग 13 सौ हेक्टेयर था, जो घटकर 11सौ हेक्टेयर में हो गया। हालांकि कारखाना प्रबंधन की माने तो इस साल 1219 हेक्टेयर में किसानों ने गन्ने की खेती की है।
कारखाना के महाप्रबंधक लीलेश्वर देवांगन ने बताया कि शक्कर कारखाना में गन्ना की पेराई सुचारू रूप से चल रही है। गन्ने की आवक थोड़ी कम है। किसान गन्ना ला रहे हैं। किसानों को गन्ने की फसल लेने जागरूक भी कर रहे हैं।
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Updated on:
06 Feb 2026 11:32 pm
Published on:
06 Feb 2026 11:31 pm
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