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‘नग्न किया और फिर…’, राजस्थान में ये कैसा ‘तालिबानी टॉर्चर’? जानें पूरा घटनाक्रम

लोग तमाशबीन बने रहे और मोबाइल से वीडियो बनाते रहे, लेकिन कानून को हाथ में लेने से किसी ने नहीं रोका।

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राजस्थान के बारां जिले में सोमवार देर शाम चोरी और मोबाइल छीनने के संदेह पर उग्र भीड़ ने दो युवकों को पकड़कर न केवल उनके कपड़े उतार दिए, बल्कि उन्हें निर्वस्त्र कर सड़क पर बैठाया और लात-घूंसों व डंडों से जमकर पिटाई की। इस दौरान लोग तमाशबीन बने रहे और मोबाइल से वीडियो बनाते रहे, लेकिन कानून को हाथ में लेने से किसी ने नहीं रोका।

भीड़ बन गई 'जज' !

घटना सोमवार शाम की है जब बारां के बस स्टैंड और चारमूर्ति चौराहा स्थित एक दुकान पर अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो संदिग्ध युवकों को लोगों ने पैसे चोरी करने और मोबाइल छीनकर भागने के आरोप में घेरा। पकड़े जाते ही भीड़ का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने कानून और पुलिस का इंतजार करने के बजाय खुद ही 'सजा' मुकर्रर कर दी। देखते ही देखते दोनों युवकों को सरेआम नग्न कर दिया गया।

बर्बर पिटाई और तालिबानी टॉर्चर!

चश्मदीदों के बयानों के अनुसार, यह पिटाई किसी सजा से कम नहीं थी। भीड़ ने दोनों संदिग्धों को निर्वस्त्र कर सड़क के बीचों-बीच बैठा दिया। इसके बाद शुरू हुआ 'तालिबानी टॉर्चर'। भीड़ में शामिल लोग बारी-बारी से उन पर हमला कर रहे थे। उन्हें सरेराह घसीटा गया और बेरहमी से पीटा गया।

पुलिस की एंट्री और हिरासत

सूचना कोतवाली थाना पुलिस तक पहुँची, तो सीआई योगेश चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस ने किसी तरह उग्र भीड़ के चंगुल से दोनों लहूलुहान युवकों को छुड़ाया।

सीआई योगेश चौहान ने बताया कि दोनों संदिग्धों को डिटेन कर लिया गया है। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए पुलिस उन्हें तत्काल अस्पताल ले गई, जहाँ उनका प्राथमिक उपचार चल रहा है।

पुलिस का कहना है कि फिलहाल चोरी के संबंध में किसी ने लिखित रिपोर्ट नहीं दी है, लेकिन भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने के मामले की जांच की जा रही है।

कानून का डर खत्म?: सुरक्षा पर उठते सवाल

बारां में बदमाशों के बढ़ते आतंक और मोबाइल छिनैती की घटनाओं से जनता में आक्रोश तो है, लेकिन जिस तरह से भीड़ ने 'मॉब लिंचिंग' जैसी स्थिति पैदा की, वह चिंताजनक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'तालिबानी टॉर्चर' समाज में बढ़ती असहिष्णुता और पुलिस के प्रति घटते विश्वास का संकेत है। चोरी के आरोप की पुष्टि होने से पहले ही सरेआम नग्न कर पीटना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।

सजा का हक सिर्फ कानून को

बारां की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक चुस्ती पर सवाल उठाए हैं। यदि चोरी हुई थी, तो उचित प्रक्रिया के तहत पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए थी। भीड़ द्वारा किया गया यह 'बर्बर इंसाफ' लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इन युवकों पर लगे आरोपों की जांच के साथ-साथ, उन लोगों पर क्या कार्रवाई करती है जिन्होंने बीच सड़क पर इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया।