
बरेली। एक दौर था जब जेब से निकली माचिस की तीली से पहचान बनती थी और नाम होता था विमको। रामपुर रोड स्थित सीबीगंज की वही ऐतिहासिक फैक्ट्री, जिसने दशकों तक देश-दुनिया में भारतीय माचिस उद्योग की धाक जमाई। समय के साथ इसकी चमक की रोशनी भी धुंधली होती चली गई। फैक्ट्री में 12 साल से उत्पादन बंद है। विमको फैक्ट्री को पहले आईटीसी और अब एसआरएमएस ट्रस्ट ने खरीदा है।
हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में दिवंगत सुपरस्टार की फिल्म अमर प्रेम में दिखी वह मामूली-सी माचिस, असल में सीबीगंज की इसी फैक्ट्री में बनी विमको थी। परदे पर एक दृश्य ने ब्रांड को अमर कर दिया। आम घरों से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक, विमको माचिस भरोसे का प्रतीक बनी।
ब्रिटिश काल में वर्ष 1929 में स्थापित यह फैक्ट्री सैकड़ों बीघा में फैली थी। जनवरी 2015 तक यहां 663 कर्मचारी कार्यरत रहे। उसी साल सभी को वीआरएस देकर उत्पादन पर ब्रेक लग गया। इससे पहले, 2013 में विमको का विलय ITC Limited (तत्कालीन इंपीरियल टोबैको कंपनी) में हुआ। सीबीगंज इकाई में पहिया फिर नहीं घूम सका।
अब इस ऐतिहासिक परिसर को एसआरएमएस ट्रस्ट ने खरीदा है। एसआरएमएस ट्रस्ट के सेक्रेट्री आदित्य मूर्ति ने बताया कि माचिस की जगह मेंटर्स, मशीनों की जगह मॉडर्न लैब्स, और धुएं की जगह डिग्री व स्किल। विश्वविद्यालय के जरिए तकनीकी शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग, स्टार्टअप इकोसिस्टम और इंडस्ट्री-लिंक्ड कोर्स शुरू होंगे। आईटीसी कंपनी से एग्रीमेंट हो चुका है। फैक्ट्री को टेकओवर किया जा रहा है। इससे रोज़गार, स्टार्टअप्स और स्थानीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। युवाओं को जॉब-रेडी स्किल्स, नए स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन सपोर्ट दी जायेगी।
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Updated on:
09 Feb 2026 05:27 pm
Published on:
09 Feb 2026 05:26 pm
