
Sadhvi Prem Baisa Death Case (Patrika Photo)
Sadhvi Prem Baisa Death Case: राजस्थान की प्रसिद्ध कथावाचक और भजन गायिका साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए गठित यह SIT एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व में काम करेगी। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि मौत के पीछे किसी बड़ी साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स और आश्रम के सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है।
जांच का सबसे अहम पड़ाव वह इंजेक्शन है, जो मौत से ठीक पहले साध्वी को दिया गया था। पुलिस ने कंपाउंडर देवी सिंह को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की है।
इंजेक्शन में कौन सी दवा थी और क्या वही मौत की वजह बनी? पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिससे मौत के सटीक समय और कारणों का खुलासा होगा।
एसआईटी की जांच का दायरा केवल बाहरी लोगों तक सीमित नहीं है। पुलिस साध्वी के पिता विरमनाथ और साधना कुटीर आश्रम के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ करेगी। घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए आश्रम के अंदरूनी विवादों और वित्तीय लेनदेन के कोणों को भी जांचा जा रहा है।
परेऊ की बेटी से जोधपुर की 'साध्वी' तक का सफर
मूल रूप से बालोतरा के परेऊ गांव की रहने वाली प्रेम बाईसा का जीवन संघर्षों और अध्यात्म से भरा रहा। मात्र 2 साल की उम्र में मां को खोने के बाद पिता उन्हें जोधपुर ले आए। संत राजाराम और संत कृपाराम महाराज के सानिध्य में उन्होंने भागवत कथा और भजन सीखे। अपनी सुरीली आवाज और ज्ञान के कारण वे जल्द ही घर-घर में प्रसिद्ध हो गईं।
बाद में उन्होंने पाल रोड पर 'साधना कुटीर' बनाया, जिसके उद्घाटन में योग गुरु बाबा रामदेव जैसी हस्तियां पहुंची थीं। प्रेम बाईसा की मौत सिर्फ एक धार्मिक हस्ती का जाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपे रहस्य ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह एक स्वाभाविक मौत थी या किसी गहरी साजिश का हिस्सा? इसका जवाब अब एसआईटी की जांच में ही मिलेगा।
Published on:
31 Jan 2026 10:03 am
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