
The pain of the potter community resonated in the assembly.
विधानसभा में मांडल विधायक उदयलाल भडाणा ने कुम्हार (प्रजापत) समाज के परम्परागत रोजगार और आजीविका के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। भडाणा ने सरकार का ध्यान प्रजापत समाज की आवा-कजावा प्रणाली (मिट्टी पकाने की भट्टी) पर मंडरा रहे संकट की ओर खींचा।
विधायक ने सदन में कहा कि राजस्थान के कुम्हार समाज की आजीविका का मुख्य साधन मिट्टी के बर्तन बनाना और आवा-कजावा प्रणाली है। यह कार्य पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है, लेकिन वर्तमान में प्रदूषण नियंत्रण विभाग इसे प्रदूषण की श्रेणी में मानकर समाज के लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहा है। विभागीय कार्रवाई के डर से इस समाज के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
भडाणा ने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने सदन में निम्नलिखित मांगें रखीं। आवा-कजावा प्रणाली को तत्काल प्रभाव से प्रदूषण रहित श्वेत सूची में शामिल किया जाए ताकि कारीगर बिना भय के अपना काम कर सकें। कुम्हार/प्रजापत समाज की आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई 2026 आजीविका नियमावली जारी की जाए। हर पंचायत स्तर पर कारीगरों को बर्तन बनाने के लिए सुगमता से मिट्टी उपलब्ध कराई जाए।प्रमुख शहरों में मिट्टी के बर्तन बेचने के लिए आरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश जारी हों।
कुम्हार समाज का काम हमारी संस्कृति और पर्यावरण दोनों का रक्षक है। प्रदूषण विभाग के नियमों की आड़ में इनका उत्पीड़न बंद होना चाहिए। सरकार को इन्हें संरक्षण देकर इनकी कला को जीवित रखना होगा।
उदयलाल भडाणा, विधायक, मांडल
Published on:
04 Feb 2026 08:16 pm
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