
मूल निवासी प्रमाणपत्र की गड़बड़ी पर जेल
Bhind- एमपी में मूल निवासी प्रमाणपत्र की गड़बड़ी महंगी पड़ गई। इस चक्कर में एक डॉक्टर 3 सालों के लिए जेल की सलाखों के बीच पहुंच गया है। चिकित्सक को भोपाल कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है। डॉक्टर कनेरा में पदस्थ था। उसने कूटरचित प्रमाणपत्र के आधार पर एमपी की मेडिकल सीट पर प्रवेश लिया। डॉक्टर बनने के बाद मामला खुला तो कोर्ट में केस चला। भोपाल कोर्ट ने डॉक्टर को दोषी पाते हुए तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोषी डॉक्टर पर 2 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
भिंड में कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र का उपयोग कर मप्र की मेडिकल सीट पर प्रवेश लेकर डॉक्टर बने सीताराम पुत्र नत्थीलाल शर्मा को मामले में दोषी पाया गया है। भोपाल के अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने उसे दोषी करार देते हुए तीन साल सश्रम कारावास एवं अलग-अलग धाराओं में दो हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एडीपीओ आकिल खान ने बताया कि सीताराम शर्मा ने वर्ष 2009 में मप्र के कोटे से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था। उसने अध्ययन पूर्ण किया और इसके बाद संविदा अनुबंध भी पूरा किया। संविदा अनुबंध पूर्ण होने के बाद सीताराम शर्मा को स्थाई डॉक्टर बना दिया गया था।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में शर्मा को स्थाई डॉक्टर के रूप में नियुक्त किया गया था। वह अटेर विकासखंड के कनेरा में उप स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ था।
Published on:
30 Jan 2026 06:40 pm
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