
भिवाड़ी. बीडा में गत वर्ष भूरूपांतरण की दर्जनों फाइल दबाने और जानकारी नहीं देने पर पत्रिका ने दूसरे दिन पड़ताल की, जिसमें जानकारी नहीं देने की कई वजह निकलकर सामने आई। जिसमें सबसे प्रमुख वजह एक अधिकारी की ओर से पत्नी के नाम खरीदा गया भूखंड है। अधिकारी ने पत्नी के नाम से भूखंड खरीदकर उसकी बीडा से ही 90ए कराई है। राजस्व ग्राम बूढ़ीबावल तहसील कोटकासिम में खसरा संख्या 2482/2453 रकबा 0.0513 हेक्टेयर भूमि से अनुमोदित साइट प्लान के अनुसार औद्योगिक प्रयोजनार्थ 513 वर्गमीटर भूमि पत्नी के नाम से खरीदी गई है। इस भूखंड की बाजार कीमत करीब दो करोड़ रुपए से ऊपर है, क्योंकि पास में ही रीको का कारोली, खुशखेड़ा और सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र है, जिसमें रीको की नीलामी में कई बार पांच सौ वर्गमीटर के भूखंड की कीमत 40 से 50 हजार रुपए के बीच में रही है। यहां रीको की आधार नीलामी दर ही 35 हजार रुपए वर्गमीटर है। शायद यही वजह है कि बीडा अधिकारियों ने नियम कायदों को ताक पर रखकर आरटीआई में मनमर्जी की कहानियां लिख डाली। क्योंकि उन्हें डर था कि 90ए की पत्रावली देने पर कई तरह की अन्य तकनीकि खामियां उजागर हो सकती हैं जो कि अभी तक दबी हुई हैं। शायद बीडा अधिकारी अपने आप को कानून और नियम कायदों से ऊपर समझ रहे हैं कि उनके दबाने से फाइल नहीं खुलेगी।
अधीनस्थों ने किया असहज
बीडा के वरिष्ठ अधिकारी के संज्ञान में संबंधित अधिकारी की पत्नी के नाम से भूखंड खरीदने का मामला आया। उक्त भूखंड की 90ए की प्रक्रिया सुपरफास्ट तरीके से पूरी की गई। वरिष्ठ अधिकारी ने कटाक्ष करते हुए बैठक में कहा भी कि इस भूखंड की तरह ही अन्य फाइल भी तेजी से दौडऩी चाहिए। कुछ समय बाद अधीनस्थों ने कुछ फाइल पर आपत्तियां लगा दी, तब वरिष्ठ अधिकारी ने एक बार तल्ख लहजे में कहा कि अगर इन फाइलों को निस्तारित नहीं किया गया तो अन्य 90ए हो चुकी फाइल को भी निरस्त कर दूंगा। इस तरह वरिष्ठ अधिकारी भी अधीनस्थों की इस कार्यप्रणाली से असहज हुए लेकिन कार्रवाई करने से बचते रहे। विभिन्न वजहों से अधीनस्थों की कार्यप्रणाली पर पर्दा डालने की कोशिश करते रहे। अधीनस्थों ने 90ए की फाइल सबसे ज्यादा जिस क्षेत्र में स्वीकृत की, वहां भूखंड खरीदने पर भी उन्होंने इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं दी।
साहब को ही मिल सकता है सस्ता भूखंड
साहब की पत्नी के नाम से भूखंड खरीदने का मामला उजागर होने के बाद, बीडा में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। साहब ने भूखंड खरीदने के लिए सस्ती दर और बैंक से ऋण लेने का हवाला दिया। इस तरह भूखंड खरीदने की प्रक्रिया को नियमानुसार ठहराने का प्रयास किया। जबकि जानकारों के अनुसार सस्ता भूखंड साहब को ही मिल सकता है क्योंकि उन्होंने ही उक्त क्षेत्र में भूमाफिया को पनपाया है। उनकी जमकर मदद की है। सस्ती दर और बैंक से जो ऋण लिया है उस पंूजी में अन्य किसी को वहां भूखंड नहीं मिल सकता। बीडा अधिकारी कर्मचारी भी अब कह रहे हैं कि जिस तरह साहब ने वहां सस्ता भूखंड लिया है, अगर हमें भी वहां इतना बैंक ऋण लेने पर मिल जाए तो पूरी बीडा ही भूखंड खरीदने को तैयार बैठी है।
Updated on:
22 Jan 2026 07:28 pm
Published on:
22 Jan 2026 07:27 pm

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