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सोना गलाकर बना दे रहे ‘बिस्किट’, फिर फटाफट साफ हो जाते सारे सबूत

Irani Gang Bhopal: जांच में सामने आया है कि दिल्ली के अट्टा मार्केट में करीब 20 लाख रुपए की ज्वैलरी चोरी और नोएडा में ज्वैलरी शॉप को निशाना बनाने की साजिश केवल एक कड़ी थी....

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Irani Gang Bhopal

Irani Gang Bhopal (फोटो सोर्स: पत्रिका)

Irani Gang Bhopal: ईरानी डेरा एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर है। इस इरानी गैंग का आपराधिक नेटवर्क अब भी दिल्ली, नोएडा और भोपाल तक फैला हुआ है। इसी कारण जांच एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं और काले ईरानी, उसके करीबी मुख्तार, सरताज और काले का बेटा अली हैदर ईरानी सहित गैंग के अन्य सदस्यों की मौजूदा गतिविधियों की परत-दर-परत जांच की जा रही है। एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं कि गैंग के कई सदस्य अभी भी अलग-अलग शहरों में घूम रहे हैं और नए ठिकाने बदल रहे हैं।

दिल्ली एनसीआर में है यह गैंग सक्रिय

जांच में सामने आया है कि दिल्ली के अट्टा मार्केट में करीब 20 लाख रुपए की ज्वैलरी चोरी और नोएडा में ज्वैलरी शॉप को निशाना बनाने की साजिश केवल एक कड़ी थी। असल में काला ईरानी दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय तक सक्रिय रहा और उसने यहां मजबूत नेटवर्क खड़ा कर लिया था। वह अपने बेटे हैदर अली समेत गैंग के सदस्यों को अलग-अलग इलाकों में रेकी के लिए भेजता था। वारदात से पहले कई दिनों तक दुकानों की निगरानी की जाती थी और मौका मिलते ही ताले चटकाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था।

वारदात के बाद शुरु होता है दूसरा चरण

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार ईरानी गैंग की पहचान सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं थी, बल्कि चोरी के बाद अपनाए जाने वाले तरीके ने इसे और खतरनाक बना दिया। वारदात के तुरंत बाद आरोपी भोपाल या अन्य सुरक्षित ठिकानों पर पहुंच जाते थे। वहीं से पूरे खेल का दूसरा चरण शुरू होता था।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाल रही टीमें

काले ईरानी के नेटवर्क की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए जांच टीमें कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों, प्रॉपर्टी दस्तावेजों और संदिग्ध लेन-देन की बारीकी से जांच की जा रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि दिल्ली और नोएडा में किन लोगों ने गैंग को ठिकाना, वाहन और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया।

सोने को ऐसे मिटाया जाता था सबूत

ज्वैलरी चोरी या लूट के बाद जेवरात सीधे बाजार में नहीं बेचे जाते थे। यह सोने को भोपाल या सुरक्षित ठिकानों पर ले जाकर गलाते हैं। और गले हुए सोने से बिस्किट तैयार किए जाते है। जिससे बिस्किट बनते ही जेवरात की पहचान खत्म हो जाती थी। इसी तरीके से पुलिस सबूतों से बचने की कोशिश की जाती है।

जांच में है ईरानी डेरा

स्थानीय पुलिस के मुताबिक यहीं से गैंग के कई ऑपरेशन नियंत्रित होते थे। ईरानी गैंग के ईरानी द्वारा फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जाई गई संपत्तियों और अवैध निर्माणों की फाइलें दोबारा खोली गई हैं। एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं संपत्तियों के जरिए अपराध से कमाए गए पैसे को खपाया और छिपाया गया। जांच एजेंसियां काले ईरानी गैंग के हर मूवमेंट पर नजर बनाए हुए हैं और संकेत हैं कि आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर और भोपाल में एक साथ बड़ी कार्रवाई हो सकती है।