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जीनत अमान ने धर्मेंद्र संग वायरल सीन दिखाकर बॉलीवुड के ईव-टीजिंग कल्चर पर तोड़ी चुप्पी

Zeenat Aman Reveals on Bollywood eve-teasing culture: जीनत अमान ने धर्मेंद्र के साथ एक वायरल सीन के जरिए बॉलीवुड के ईव-टीजिंग कल्चर पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

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जीनत अमान

जीनत अमान (सोर्स: x @FilmHistoryPic के अकाउंट द्वारा)

Zeenat Aman Reveals on Bollywood eve-teasing culture: 90s की फेमस एक्ट्रेस जीनत अमान ने हाल ही में अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट के द्वारा हिंदी सिनेमा में हीरोइन के रूपों में आए बदलाव पर विचार शेयर किए हैं। जिसमें उनकी ये पोस्ट 2 अलग‑अलग फिल्मों के क्लिप में मौजूद है, जिसने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है।

स्टाइलिश और आक्रामक सीन

जीनत ने अपनी और धर्मेंद्र की फिल्म 'दोस्ताना' के एक क्लिप को शेयर कर कहा कि पुरानी फिल्में दोबारा देखने पर कई यादें और विचार उभर आते हैं। इससे पहले उन्होंने एक और क्लिप शेयर की थी जिसमें अमिताभ बच्चन के किरदार इंस्पेक्टर विजय का एक सीन था और इस बार वे 'तीसरी आंख' की एक स्टाइलिश और आक्रामक सीन की भी बात कर रही हैं जिसमें वे धर्मेंद्र के किरदार के साथ ज्यादा एक्टिव दिखाई देती हैं।

साथ ही, जीनत ने ये भी सवाल उठाया कि क्या फिल्मी परदे पर एक्ट्रेस की स्थिति पिछले कुछ सालों में सचमुच बदल गई है। उनके मुताबिक, इन 2 फिल्मों के बीच का फर्क दर्शाती है कि परंपरागत ढांचे में अब कुछ मोड़ आए हैं। जहां पहले पुरुष अधिक आक्रामक दिखते थे, तो वहीं अब महिलाओं के किरदारों में भी आक्रामकता और पहल करने का स्थान दिखने लगा है। वे बताती हैं कि उनके किरदार बरखा में एक तरह की बेबाकी और आगे आने वाली प्रवृत्ति दिखती है, जबकि पुरुष किरदार अपेक्षाकृत ज्यों के त्यों चिड़चिड़े और अनिच्छुक दिखते हैं।

मनोरंजन और मस्ती अलग बातें

उसी समय जीनत ने सहमति और सम्मान पर भी साफ रूप से जोर दिया और कहा कि मनोरंजन और मस्ती अलग बातें हैं, लेकिन रिश्तों में सहमति और पारस्परिक सम्मान कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए। वे स्वीकार करती हैं कि उन्होंने भी अपने करियर में रोमांस के मजाकिया अंदाज को पेश किया है और कहा कि कई बार इंडस्ट्री इसे चरम तक भी ले जाती है। जीनत ने ये भी माना कि व्यक्तिगत तौर पर उन्होंने ये पाठ कठिन अनुभवों से सीखा है।

बता दें, जीनत के इन विचारों को सोशल मीडिया पर मिला‑जुला रिएक्शन नजर आया है। कुछ लोग उनके खुले बयान की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ पुरानी फिल्मों और बदलते सामाजिक नजरिए पर चर्चा कर रहे हैं। जीनत की पोस्ट ने एक बार फिर ये सवाल उठाया है कि फिल्मी कहानीकारों और दर्शकों के बदलते रुख के बीच संतुलन कैसे बने और ऑन‑स्क्रीन रिश्तों की जिम्मेदारी किस तरह निभाई जाए।