
बूंदी. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से जंगल सफारी कर लौटते हुए विदेशी पर्यटक।
बूंदी. बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई सफारी पर्यटकों की जेब पर भारी पड़ रही है। इसका मुख्य कारण टाइगर रिजर्व प्रबंधन का अब तक नेचर गाइड के चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं किया जाना है।
जानकारी के अनुसार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने लगभग एक वर्ष पूर्व नेचर गाइड के लिए आवेदन लिए थे। इसके लिए 221 जनों ने आवेदन किया, जिनमें से 198 आवेदकों ने प्रति आवेदन 100 रुपए के हिसाब से शुल्क भी जमा करवाया। लेकिन अब तक न तो नेचर गाइड का चयन हुआ है और न ही उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है। चयन नहीं होने से जहां आवेदनकर्ताओं में नाराजगी है, वहीं यहां आने वाले पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अपने स्तर पर गाइड
वन विभाग की ओर से नेचर गाइड का आधिकारिक चयन नहीं होने के कारण पर्यटकों को मजबूरी में अपने स्तर पर गाइड की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ऐसे में पर्यटक को न केवल गाइड का टिकट कटवाना पड़ता है बल्कि गाइड को पारिश्रमिक के रूप में अलग से राशि भी देनी होती है। इससें एक जिप्सी पर लगभग डेढ़ से दो हजार रुपए तक का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है, जिससे सफारी का खर्च आम पर्यटक की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। वहीं रणथम्भौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पर्यटकों द्वारा सफारी के लिए खरीदे जाने वाले टिकट के साथ ही नेचर गाइड की राशि भी ली जातीहै, जो माह के अंत में नेचर गाइड को रिजर्व प्रबंधन की ओर से दे दी जाती है।
यह होता है नेचर गाइड का कार्य
नेचर गाइड वन विभाग के अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करता है। उसका प्रमुख कार्य पर्यटकों को जंगल में मौजूद वन्यजीवों, पक्षियों और वनस्पतियों की सही और प्रमाणिक जानकारी देना होता है। वह वन्य जीवों की पहचान, उनकी आदतों, गतिविधियों और व्यवहार से पर्यटकों को अवगत कराता है। वह पर्यटकों को वन विभाग द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करवाता है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है। इसके अलावा गाइड वन्यजीवों के पदचिह्न, आवा•ा और अन्य संकेतों के आधार पर उनकी मौजूदगी का अनुमान लगाकर सफारी को यादगार बनाता है।
जनवरी में 5 दर्जन पर्यटकों ने किया भ्रमण
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की शुरुआत 23 जून 2023 में शुरू हुई थी। वर्तमान में तीन सफारी रूट पर ऑनलाइन बुङ्क्षकग की जा रही है, लेकिन सफारी दो रूट पर ही करवाई जा रही है। टाइगर रिजर्व के बफ र जोन के जोन नंबर एक व दो में सफारी हो रही है, जो टाइगर हिल व सूरज छतरी वाला इलाका है। भीमलत जोन में अभी टाइगर सफारी धरातल पर नहीं उतर पाई है। गत जनवरी में करीब 15 विदेशी तथा 50 देशी पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व में सफारी की।
जंगल में मौजूद हैं आठ बाघ-बाघिन
टाइगर रिजर्व में एक बाघ व पांच बाघिन जंगल में विचरण कर रहे हैं। बाघिन आरवीटी-3 के साथ एक नर शावक भी विचरण कर रहा है। एक युवा बाघ 15 माह से शॉफ्ट एनक्लोजर में बंद है। बाघिन आरवीटी 8 बूंदी शहर के पास सूरज छतरी व कालदां के जंगलों में अपनी टेरेटरी बना चुकी है, जबकि मध्यप्रदेश से लाई गई बाघिन अभी टेरेटरी की तलाश में है।
पांच जिप्सियां पंजीकृत
टाइगर रिजर्व में सफारी संचालन के लिए केवल पांच जिप्सियां ही पंजीकृत हैं। सफारी के लिए भारतीय पर्यटकों से 831 रुपए तथा विदेशी पर्यटकों से 1236 रुपए शुल्क लिया जाता है। नियमानुसार छह सवारी होने पर ही जिप्सी को जंगल में सफारी के लिए भेजा जाता है।
जंगल जानवरों का घर होता है। नेचर गाइड को पता होता है कि किस रास्ते पर जाना सुरक्षित है। किस समय कौन सा जानवर सक्रिय होता है। अचानक खतरा हो तो क्या करना चाहिए, जिससे टूरिस्ट सुरक्षित रहे। जानवरों और प्रकृति की सही जानकारी नेचर गाइड को पता होती है। पशु और पक्षियों की पहचान आवाज से करने के बारे में नेचर गाइड को पता होता है। जंगल और वन्य जीवों का संरक्षण गाइड टूरिस्ट को जिम्मेदार बनाता है।
संदीप शर्मा गाइड
राष्ट्रीय उद्यानों में सफारी पर आने वाले अधिकांश पर्यटक पहली बार जंगल का अनुभव लेते हैं। बिना प्रशिक्षित नेचर गाइड के सफारी करने पर न तो उन्हें वन्यजीवों की सही जानकारी मिलती है और न ही जंगल को समझने का अवसर, इससे वे निराश होकर लौटते हैं।
नरेन्द्र सिंह, गाइड
नेचर गाइड के लिए मैरे आने से पूर्व आवेदन लिए गए थे। पर्यटकों को होने वाली समस्या के बारे में जानकारी मिली है। शीघ्र समाधान करेंगे।
अरुण कुमार डी, उपवन संरक्षक,रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र
Updated on:
09 Feb 2026 11:58 am
Published on:
09 Feb 2026 11:57 am
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