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बुरहानपुर में खून की कमी से जूझ रही महिलाएं,2 साल में 42 मौतें, हर माह 100 पंजीयन

खकनार, धूलकोट में आदिवासी बहुल क्षेत्रों से आ रही महिलाए High-risk pregnancy news. जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयास कागजी साबित हो रहे है। 2 साल में 42 गर्भवतियों की मौत होने के साथ हर माह लगभग 100 महिलाओं का उच्च जोखिम ( हाइरिस्क) श्रेणी में पंजीयन […]

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खकनार, धूलकोट में आदिवासी बहुल क्षेत्रों से आ रही महिलाए

High-risk pregnancy news. जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयास कागजी साबित हो रहे है। 2 साल में 42 गर्भवतियों की मौत होने के साथ हर माह लगभग 100 महिलाओं का उच्च जोखिम ( हाइरिस्क) श्रेणी में पंजीयन हो रहा है। खकनार, धूलकोट आदिवासी बहुल क्षेत्रों में हाईरिस्क वाली महिलाओं तक मैदानी अमला नहीं पहुंचने से नियमित जांच और टीके तक नहीं लग रहे है। सबसे अधिक खून की कमी के कारण महिलाएं दम तोड़ रही है।


साल 2023-24 में 22 और 2024-25 में 20 गर्भवतियों की मौत हुई है। जिला अस्पताल में हर दिन 30 गर्भवतियों की जांच करने के साथ हाइरिस्क गर्भवती की पहचान एवं उपचार के लिए हर माह में दो बार प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर लगाने के साथ डिलीवरी के समय डॉक्टरों की निगरानी के लिए अलग कक्ष बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 52 प्रकार की हाइरिस्क श्रेणी बनाई गई है जो महिलाएं इस श्रेणी में आती है उनका पंजीयन पोर्टल पर किया जाता है। जिलेभर से हर माह लगभग 100 ऐसी महिलाओं का पंजीयन हो रहा है जो हाइरिस्क श्रेणी में एनीमिया पीडि़त, टीबी, एचआइवी के साथ अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रही है।

मौत की बड़ी वजह,जांच में लापरवाही

शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों से चेकअप के लिए पहुंच रही गर्भवतियों में एनीमिया अधिक है। शरीर में 5 फीसदी खून होने से गर्भवस्था के समय इमरजेंसी में खून बढ़ाना पड़ रहा है। नियमित जांच नहीं होने से एनीमिया की पहचान नहीं हो रही है। इस कारण गर्भवति के साथ बच्चें की जान को खतरा रहता है। यह स्थिति उच्च जोखिम श्रेणी कहलाती है। हाइरिस्क वाली महिलाओं को बहुत ज्यादा देखरेख और डॉक्टर की निगरानी में रहने की आवश्यकता रहती है।

शरीर में 5 ग्राम तक खून

नर्सिंग ऑफिसर सीमा डेविड ने कहा कि प्रसव के समय प्रसूता के शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा 11 ग्राम से अधिक होनी चाहिए। लेकिन प्रसव के लिए अस्पताल पहुंच रही महिलाओं में 5 ग्राम तक खून रहता है जो उच्च जोखिम में श्रेणी में है। खकनार, धूलकोट, नेपानगर क्षेत्र से आने वाली महिलाओं में खून की कमी अधिक पाई जाती है। कही बार जांच करने या पूछने पर टीका नहीं लगने एवं नियमित जांच नहीं होना पाया जाता है। जिसकी रिपोर्ट बनाकर विभाग के अफसरों तक पहुंचा रहे है।

हाइरिस्क होने की वजह

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रतिभा बागराण ने बताया कि प्रसव के बीच कम अंतराल,पिछला सीजेरियन प्रसव होने के साथ एनीमिया, मधुमेह, हाइब्लड प्रेशर और थायराइड मुख्य वजह है। 18 साल से कम (किशोरावस्था) या 35 साल से अधिक की उम्र में गर्भधारण को भी उच्च जोखिम श्रेणी में शामिल किया जाता है। गर्भवस्था के दौरान सिरदर्द रहना, चक्कर आने के साथ हाथों, पैरों और चेहरे पर सूजन, योनि से रक्तस्राव, शिशु की हलचल कम रहती है तो जांच कराना चाहिए।