
बजट में इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ी कई घोषणाएं हो सकती हैं। (PC: AI)
Budget 2026: जीएसटी में बदलाव के बाद अब इंश्योरेंस सेक्टर की नजरें आने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 पर टिकी हैं। बीमा कंपनियां चाहती हैं कि सरकार लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर इनकम टैक्स के फायदे बढ़ाए। दोनों टैक्स रिजीम में टर्म और हेल्थ प्लान्स के लिए छूट मिले। पेंशन स्कीम्स को और मजबूत सपोर्ट दिया जाए। साथ ही हाई वैल्यू वाली पॉलिसीज के मैच्योर होने पर मिलने वाली रकम पर टैक्स लगने की सीमा को 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए किया जाए। यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान्स (यूलिप्स) के लिए भी टैक्स-फ्री मैच्योरिटी की लिमिट को 2.50 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख तक ले जाने की मांग है।
जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी के तहत डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने की बात कर रही हैं। अभी 60 साल से कम उम्र के लोगों और परिवारों के लिए ये 25 हजार रुपए है। जबकि सीनियर सिटीजंस के लिए 50 हजार रुपए है। मेडिकल खर्चों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए ये लिमिट कम पड़ रही है।
फरवरी 2023 में सरकार ने यूलिप्स को छोड़कर बाकी ट्रेडिशनल पॉलिसीज पर सालाना 5 लाख से ज्यादा प्रीमियम वाली स्कीम्स पर इनकम टैक्स लगाना शुरू किया था। इससे पहले ये पूरी तरह टैक्स-फ्री होती थीं। अब इंडस्ट्री का मानना है कि महंगाई और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए ये सीमा ऊंची होनी चाहिए, ताकि लोग ज्यादा निवेश करें और सिक्योरिटी बढ़े।
क्लाइमेट चेंज के खतरे भी इंश्योरेंस इंडस्ट्री की चिंता में हैं। एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के सीईओ नवीन चंद्र झा ने कहा कि बजट में क्लाइमेट- रिस्क इंश्योरेंस को बढ़ावा देने वाले कदम उठाए जा सकते हैं। इससे रिस्क मैनेजमेंट मजबूत होगी। एक ही जगह इंश्योरेंस डेटा एक्सचेंज और कंसेंट बेस्ड डिजिटल सिस्टम से अंडरराइटिंग सही होगी और फ्रॉड रुकेगा।
Updated on:
27 Jan 2026 11:50 am
Published on:
27 Jan 2026 11:48 am
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