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Budget 2026: आयकर में राहत पर टिकी वेतनभोगियों की निगाहें, व्यापारियों को जीएसटी सरलीकरण की आस

केंद्रीय बजट 2026 में वेतनभोगियों को आयकर में छूट और व्यापारियों को जीएसटी सरलीकरण की उम्मीद है। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट से राज्यों की टैक्स हिस्सेदारी 41% से बढ़कर 45% हो सकती है। पढ़ें बजट की बड़ी मांगें और संभावित बदलाव।

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nirmala sitharaman

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (PC: X/nsitharaman)

केंद्र सरकार के रविवार को पेश होने वाले बजट में जहां आम आदमी व वेतनभोगी कर्मचारी आयकर में और छूटों की उम्मीद कर रहे हैं वहीं व्यापारियों को जीएसटी सरलीकरण व कागजी खानापूर्ति में राहत की आस है। पिछले बजट में सरकार ने नई आयकर योजना में 12 लाख तक की आय पर इनकम टैक्स में बंपर छूट दी थी लेकिन आम आदमी इसके साथ ही पुरानी आयकर योजना में दी जा रही निवेश छूटों को नई योजना में भी शामिल करने की उम्मीद कर रहा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए जाने वाले लगातार नवें बजट में सबसे बड़ी नजर 16वें केंद्रीय वित्त आयोग (एसएफसी) की रिपोर्ट पर अमल पर रहेगी। अर्थशास्त्री अरविंद पनगढि़या अध्यक्षता वाला एसएफसी गत नवंबर में रिपोर्ट पेश कर चुका है जिसका खुलासा आगामी बजट में होगा। एसएफसी अगले पांच साल (2026-2031) के लिए केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा तथा राज्यों की इस किट्टी में राज्यवार हिस्सेदारी के बंटवारे का फार्मूला तय करता है।

सूत्रों के अनुसार एसएफसी की रिपोर्ट में राज्यों का हिस्सा 41% से बढ़ाकर 45% तक किए जाने की उम्मीद है। एसएफसी के दौरों के दौरान विपक्ष शासित ही नहीं, एनडीए की राज्य सरकारों ने भी यह हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की थी। इसके अलावा एसएफसी राज्यवार हिस्सा तय करने के लिए नया फार्मूला बना सकता है जिसमें ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए किए गए सुधारों को शामिल कर सकता है।

केंद्रीय योजनाओं में बढ़ सकता राज्यों पर बोझ

सूत्रों के अनुसार बजट में केंद्र प्रवर्तित योजनाओं पर खर्च में राज्यों का हिस्सा (मैचिंग ग्रांट) बढ़ाया जा सकता है। हालांकि गैर-एनडीए शासित राज्यों ने मैचिंग ग्रांट बढ़ाने का विरोध किया है लेकिन जिस तरह से मनरेगा के स्थान पर लाई गई वीबी जीरामजी योजना में खर्च पर केंद्र व राज्य की हिस्सेदारी 60:40 की गई है उससे लगता है कि अन्य योजनाओं में बेंचमार्क हिस्सेदारी बढ़ाई जाएगी। फिलहाल देश में 59 केंद्र प्रवर्तित योजनाएं चल रही हैं जिनमें मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जलजीवन मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मिड-डे मील प्रमुख हैं।

15वें वित्त आयोग ने इन आधारों पर तय किया राज्यों का हिस्सा

आधारवेटेज (%)
औसत प्रति व्यक्ति आय45%
जनसंख्या15%
भौगोलिक क्षेत्र15%
जनसांख्यिकीय प्रदर्शन12.5%
वन आवरण एवं पारिस्थितिकी10%
कर संग्रह और राजकोषीय प्रयास2.5%

केंद्र से आवंटित करों की कुल राशि में प्रमुख राज्यों का हिस्सा

राज्यकेंद्र से आवंटित करों में हिस्सा (%)
उत्तर प्रदेश17.94
बिहार10.06
मध्यप्रदेश7.85
पश्चिम बंगाल7.52
राजस्थान6.03
कर्नाटक3.65
गुजरात3.48
छत्तीसगढ़3.41

वित्त आयोग ने यों बढ़ाया राज्यों का हिस्सा

वित्त आयोगअवधिकेंद्र करों में राज्यों का हिस्सा (%)
11वां वित्त आयोग2000–0529.5%
12वां वित्त आयोग2005–1030.5%
13वां वित्त आयोग2010–1532%
14वां वित्त आयोग2015–2042%
15वां वित्त आयोग2021–2641%

वित्त आयोग ने यों बढ़ाया राज्यों का हिस्सा

वित्त आयोगअवधिकेंद्र करों में राज्यों का हिस्सा (%)
11वां वित्त आयोग2000–0529.5%
12वां वित्त आयोग2005–1030.5%
13वां वित्त आयोग2010–1532%
14वां वित्त आयोग2015–2042%
15वां वित्त आयोग2021–2641%

स्टार्टअप्स चाहते टैक्स राहत और मदद

  • टैक्स नियम आसान व स्पष्ट हों, इसॉप पर टैक्स बोझ कम हो, टैक्स छूट की अवधि बढ़े और बार-बार नियम न बदलें।
  • सरकार-समर्थित फंड, गारंटी स्कीम को बढ़ावा मिले।
  • लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और कंप्लायंस की प्रक्रिया सरल हो।
  • निर्यात प्रोत्साहन व इंटरनेशनल नेटवर्किंग सपोर्ट मिले।

आम आदमी/वेतनभोगी को आयकर में उम्मीद

  • होम लोन: नए टैक्स रेजीम में होम लोन पर ब्याज पर टैक्स छूट मिले।
  • बीमा: स्वास्थ्य-बीमा पर छूट नई टैक्स रेजीम में शामिल हो।
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: नई व पुरानी योजना में स्टेंडर्ड डिडक्शन सीमा 1,00,000 रुपए हो।
  • एचआरए: किराये और सैलरी स्ट्रक्चर के कारण एचआरए क्लेम जटिल, एकमुश्त छूट मिले।

कारोबारियों की मांग

  • टैक्सेशन: टैक्स ढांचा व कंप्लायंस सरल और स्थिर हो। रिफंड में देरी खत्म हो,आइटीसी मिलान तिमाही हो।
  • जीएसटी कंपोजिशन स्कीम का विस्तार 1.5 करोड़ से बढ़ाकर 3-5 करोड़ हो।
  • सिंगल विंडो रजिस्ट्रेशन: बैंक, टेलीकॉम, इनकम टैक्स, पैन-इंडिया सेवाओं के लिए सिंगल विंडो रजिस्ट्रेशन व्यवस्था होनी चाहिए।
  • अमेरिकी टैरिफ वृद्धि से प्रभावित उद्योगों के लिए सब्सिडी दी जाए।