
पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (AI Generated Image)
Economic Shield: केंद्रीय बजट 2026 केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ भारत की एक मजबूत ढाल बन कर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस बजट के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'टैरिफ धमकियों' (Trump Tariff Threat) पर सधा हुआ कूटनीतिक और आर्थिक पलटवार किया है। दुनिया भर में बदल रहे व्यापारिक समीकरणों के बीच, भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था सुरक्षित करने के लिए 'आत्मनिर्भरता' का एक नया अध्याय लिखा है। दरअसल, अमेरिका की ओर से लगातार यह संकेत मिल रहे थे कि भारत समेत अन्य विकासशील देशों से आने वाले सामान पर भारी टैक्स (Tariff) लगाया जा सकता है। ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। ऐसे में, मोदी सरकार (PM Modi Strategy) ने बजट 2026 में ऐसे प्रावधान किए हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों और घरेलू उद्योगों को अमेरिकी प्रतिबंधों या महंगे टैक्स की मार (India Trade War) से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट (Union Budget 2026) भारत के लिए एक 'आर्थिक कवच' (Economic Shield) जैसा है।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में यह बात साफ कर दी है कि सरकार का फोकस अब आयात घटाने और निर्यात बढ़ाने पर है। बजट में कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) के बारे में किए गए बदलाव इसी रणनीति का हिस्सा हैं। जिन चीजों के लिए भारत अब तक दूसरे देशों पर निर्भर था, अब उनके घरेलू उत्पादन पर भारी सब्सिडी और इंसेंटिव दिए गए हैं। इसका सीधा संदेश है—अगर अमेरिका या कोई पश्चिमी देश दरवाजे बंद करता है, तो भारत अपने दम पर खड़ा रहेगा।
वैश्विक बाजार में मची उथल-पुथल को देखते हुए, बजट में भारतीय कंपनियों को टैक्स में विशेष राहत दी गई है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सामान महंगा होता है, तो सरकार उसे संतुलित कर सके। इसके अलावा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ा कर उत्पादन लागत कम करने की कोशिश की गई है, ताकि भारतीय उत्पाद दुनिया भर में प्रतिस्पर्धा बने रहें।
पीएम मोदी की दूरदर्शी सोच इस बजट में साफ झलकती है। सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे को संतुलित रखने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। बजट में डिजिटल इकोनॉमी और ग्रीन एनर्जी पर जो जोर दिया गया है, वह भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी है। संक्षेप में कहें तो, यह बजट ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों (Protectionism) के खिलाफ भारत का एक मौन लेकिन दमदार पलटवार है।
बजट 2026 पर मिली-जुली लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं:
कॉरपोरेट जगत: फिक्की और सीआईआई जैसे उद्योग संगठनों ने बजट का स्वागत किया है। उनका कहना है कि "अनिश्चित वैश्विक माहौल में यह बजट भारतीय इंडस्ट्री को सुरक्षा की गारंटी देता है।"
विपक्ष का हमला: वहीं, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय छवि बचाने के चक्कर में आम आदमी पर महंगाई का बोझ डाल रही है। विपक्ष का कहना है कि कस्टम ड्यूटी बढ़ने से मोबाइल और गैजेट्स महंगे हो सकते हैं।
शेयर बाजार: बजट के ऐलान के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल देखा गया, जो यह संकेत देता है कि निवेशकों को सरकार की यह रक्षात्मक रणनीति पसंद आई है।
इस बजट के बाद सबकी निगाहें अमेरिका और वैश्विक बाजारों पर होंगी:
अमेरिका की प्रतिक्रिया: देखना होगा कि डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन भारत के इस कदम पर क्या प्रतिक्रिया देता है। क्या वे टैक्स और बढ़ाएंगे या बातचीत का रास्ता अपनाएंगे?
ट्रेड डील: भारत और अमेरिका के बीच रुकी हुई व्यापार वार्ताओं पर इस बजट का क्या असर होगा, यह आने वाले हफ्तों में साफ हो जाएगा।
महंगाई पर नजर: सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि आयात शुल्क बढ़ाने के बाद देश के भीतर महंगाई न बढ़े। आने वाले महीनों में आरबीआई की मौद्रिक नीति इस पर निर्भर करेगी।
इस खबर का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि बजट अब सिर्फ 'अर्थशास्त्र' (Economics) नहीं रह गया है, बल्कि 'जियो-पॉलिटिक्स' (Geopolitics) का हथियार बन गया है।
चीन को भी संदेश: ट्रंप का नाम भले ही सुर्खियों में हो, लेकिन भारत की यह तैयारी चीन के लिए भी एक चेतावनी है। घरेलू उत्पादन बढ़ाकर भारत, चीन से होने वाले आयात को भी कम कर रहा है।
आत्मविश्वास: यह बजट दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक दबाव में झुकने वाला नहीं है। चाहे अमेरिका हो या यूरोप, भारत अपनी शर्तों पर व्यापार करने की क्षमता विकसित कर रहा है। यह 'न्यू इंडिया' के आत्मविश्वास की कहानी कहता है।
Updated on:
02 Feb 2026 01:25 pm
Published on:
02 Feb 2026 01:24 pm
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