
प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में भाषा की सटीक समझ सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है। इसी चुनौती को बेहतर तरीके से हल करने के लिए अब एआई कंपनियां सीधे आम लोगों की भागीदारी बढ़ा रही हैं। xAI से जुड़े आयुष जैसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी है कि Grok के लिए स्थानीय भाषा बोलने वाले लोग (Native Language Speaker) की भर्ती की जा रही है, जो AI को अपनी मातृभाषा की बारीकियां सिखाएंगे।
आयुष जैसवाल ने अपनी पोस्ट में साफ तौर पर बताया कि वह Grok के लिए ऐसे लोगों को ऑनबोर्ड करना चाहते हैं, जो अपनी भाषा को बेहतर बोलना जानते हों और एआई को सिखा सकें। उनके अनुसार, एआई को हमारी भाषा बेहतर तरीके से सिखाने में मदद करना एक संतोषजनक अनुभव है। इस भूमिका में चुने गए मेंटर्स Grok को इस तरह ट्रेन करेंगे कि वह आम इंसान की तरह स्वाभाविक भाषा में बात कर सके और सांस्कृतिक संदर्भों को भी समझ पाए।
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल छह भाषाओं को प्राथमिकता दी गई है। इनमें रूसी, अरबी, मैंडरिन, इंडोनेशियन, हिंदी और बंगाली शामिल हैं। खास बात यह है कि हिंदी और बंगाली जैसी भारतीय भाषाओं को भी इस लिस्ट में जगह दी गई है, जिससे भारतीय भाषा विशेषज्ञों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर बनता है। कंपनी का मकसद Grok को मल्टीलिंगुअल बनाना है, ताकि वह अलग अलग देशों और संस्कृतियों के यूजर्स से सहज संवाद कर सके।
आयुष जैसवाल के अनुसार, इस भूमिका के लिए यह जरूरी नहीं है कि उम्मीदवार को पहले से एआई मॉडल ट्रेनिंग का अनुभव हो। उन्होंने कहा कि अगर किसी को मॉडल ट्रेनिंग के बारे में कुछ भी नहीं पता है, तब भी यह एआई को समझने और सीखने का एक बेहतरीन तरीका हो सकता है। इस प्रक्रिया में प्रतिभागी न केवल Grok को बेहतर बनाएंगे, बल्कि खुद भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कार्यप्रणाली को करीब से समझ पाएंगे। इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एक ऑनलाइन इंटरेस्ट फॉर्म भी उपलब्ध कराया गया है, जिसके जरिए आवेदन किया जा सकता है।
Published on:
17 Jan 2026 05:35 pm
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