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IIT Madras ने लॉन्च किया Global Research Foundation, वैश्विक सहयोग को मिलेगा नया आयाम

चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) ने शुक्रवार को ‘ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन’ का शुभारंभ किया, जिससे वैश्विक नेटवर्किंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूती मिलने जा रही है।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को आईआईटी मद्रास में आयोजित समारोह में "इंडिया इनोवेशन ईकोसिस्टम: गोइंग ग्लोबल" पुस्तक का विमोचन किया।

चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) ने शुक्रवार को ‘ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन’ का शुभारंभ किया, जिससे वैश्विक नेटवर्किंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूती मिलने जा रही है। इस मौके पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फाउंडेशन का उद्घाटन किया और ‘आइआइटी-एम फेस्टिवल फोर्टनाइट’ की भी शुरुआत की। फाउंडेशन का उद्देश्य आइआइटी मद्रास को दुनिया की पहली मल्टीनेशनल यूनिवर्सिटी बनाना है।

उद्घाटन समारोह में क्या हुआ?

शुभारंभ कार्यक्रम में डॉ. एस. जयशंकर ने संवाद के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को गलतफहमी से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है ईमानदार और स्पष्ट संवाद। उन्होंने साझा किया कि भारत उन गिनी-चुनी पुरानी सभ्यताओं में से है, जो आज भी आधुनिक राष्ट्र के रूप में मौजूद हैं और अपने अतीत का अहसास रखती हैं। डॉ. जयशंकर ने भारत के लोकतांत्रिक मॉडल और पश्चिम के साथ साझेदारी की अहमियत को रेखांकित किया।

भारतीय विदेश नीति में संस्थानों की भूमिका

विदेश मंत्री ने बताया कि भारत की विदेश नीति में संस्थानों और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की व्याख्या करते हुए कहा, भारत ने कभी भी दुनिया को दुश्मन या खतरनाक स्थान नहीं माना। सीमित संसाधनों के साथ ज्यादा प्रभाव डालने का रास्ता संस्थानों की क्षमताओं के माध्यम से खोजा जा रहा है। तंजानिया में आइआइटी मद्रास कैंपस का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान की क्षमता का लाभ उठाकर भारतीय विदेश नीति ने बड़ा असर डाला है।

आइआइटी-एम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन के मुख्य उद्देश्य

आइआइटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी ने बताया कि फाउंडेशन का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाना है। इसके चार मुख्य उद्देश्य हैं:

  • टेक्नोलॉजी का विदेशों में विस्तार
  • संयुक्त विकास करार
  • स्टार्ट-अप्स को व्यवसाय के अवसर देना
  • विदेशी निवेश आकर्षित करना

आइआइटी मद्रास ने अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, दुबई, सिंगापुर और मलेशिया सहित कई देशों के संस्थानों के साथ सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारी संयुक्त शोध, उद्योग और स्टार्टअप सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा डीप-टेक इनोवेशन पर केंद्रित होगी।

क्यों है आइआइटी-एम की यह पहल महत्वपूर्ण?

IIT Madras का ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन न सिर्फ भारतीय शिक्षा को वैश्विक मंच पर ले जाने का प्रयास है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेक्नोलॉजी और शोध के क्षेत्र में भारत की भागीदारी को भी नई ऊंचाई देगा। संस्थानों की क्षमताओं और सीमित संसाधनों का प्रभावी उपयोग विदेश नीति की सफलता में अहम भूमिका निभाता है, जिसे यह फाउंडेशन और मजबूत करेगा।



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लव सोनकर

लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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टिप्पणियाँ (43)

राहुल शर्मा
राहुल शर्माjust now

यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है... यह निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।

राहुल शर्मा
राहुल शर्माjust now

हाँ, ये सोचने वाली चीज़ है

सोनिया वर्मा
सोनिया वर्माjust now

दिलचस्प विचार! आइए इस पर और चर्चा करें।

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