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MP-UP को जोड़ेगा 232 किमी का ‘फोरलेन’, 56 गांवों का मुआवजा अटका

MP News: मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को जोड़ने वाले फोरलेन प्रोजेक्ट के अंतर्गत आने वाले राज्य के 56 गांवों को मुआवजा अटक गया है।

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फोटो- एआई जनरेटेड

MP News: कबरई से सागर तक बनने वाले 232 किमी लंबे बहुप्रतीक्षित फोरलेन प्रोजेक्ट पर मध्यप्रदेश छतरपुर जिले में ब्रेक लग गया है। जहां एक ओर सागर (मप्र) और महोबा-कानपुर (यूपी) में हाईवे का निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है, वहीं छतरपुर जिले में मुआवजे के वितरण में हो रही देरी ने पूरे प्रोजेक्ट को लटका दिया है।

मुआवजे के 43 करोड़ रूपये नहीं मिले

जिले में कुल 203 करोड़ रुपए का मुआवजा बांटा जाना है, लेकिन एनएचएआई के आंकड़ों के मुताबिक अब तक केवल 160 करोड़ रुपए ही किसानों के खातों में पहुंच पाए है। शेष 43 करोड़ रुपए की राशि तकनीकी कारणों और प्रशासनिक ढिलाई के चलते अटकी हुई है।

प्रोजेक्ट में चल रही देरी

मुआवजे की इस लेत-लतीफी का सीधा असर प्रोजेक्ट के फेज-3 और फेज-4 पर पड़ा है। इन दोनों फेजों के टेंडर हुए करीब आठ महीने बीत चुके है, लेकिन जमीन पर काम शुरू नहीं हो सका है। कंपनियां काम शुरू करने को तैयार है, लेकिन अधिग्रहित भूमि का कब्जा न मिलने से मशीनें खड़ी है।

56 गांवों का मुआवजा अटका

छतरपुर, बिजावर और बड़ामलहरा तहसीलों के 56 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है। देरी का मुख्य कारण बैंक खातों का विवरण न होना और तकनीकी समस्याएं बताई जा रही हैं। हाल ही में मध्यांचल बैंक का नाम बदलकर मध्यप्रदेश बैंक होने से आईएफएससी कोड बदल गए हैं, जिससे भुगतान फेल हो रहा है। इसके अलावा, कई स्थानों पर किसान ठेकेदारों पर नक्शे से बाहर जाकर जमीन खोदने का आरोप लगाकर काम रोक रहे हैं।

क्या कहते हैं लोग

राजेश खरे निवासी गौरैया का कहना है मेरी भूमि गौरैया के पास है, वहां निर्माण शुरू हो गया है पर मुआवजा नहीं मिला। तहसील के चक्कर काटकर थक गया हूं। अब कहा जा रहा है कि एक महीने में छोटे भूस्वामियों की राशि आएगी।

हरिचरण कुशवाहा का कहना है प्लॉट अधिग्रहण हो गया पर मुआवजा नहीं मिला। अधिकारियों से मिलने पर सिर्फ आश्वासन मिलता है, जबकि पड़ोसियों को पैसा मिल चुका है। रोहित सेन निवासी बगौता ने बताया मेरा 1 हजार वर्ग फीट का प्लॉट अधिग्रहित है, लेकिन जारी सूची में नाम ही गायब है। अब अधिकारी दोबारा सर्वे में नाम जोडने की बात कह रहे हैं।

2023 में बनी थी योजना

इस फोरलेन प्रोजेक्ट की डीपीआर अप्रेल 2023 में मंजूर हुई थी। केंद्रीय भूतल परिवहन विभाग ने 2026 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा था। एनएचएआई की छतरपुर इकाई की सुस्ती के कारण प्रक्रिया पूरी करने में पहले ही एक साल की देरी हो चुकी है। अब मुआवजा वितरण में देरी इस लक्ष्य को और आगे खिसका सकती है।

फेज-3- साठिया घाटी से चौका गांव तक (55 किमी) का निर्माण 717 करोड़ की लागत से वेल्जी रत्ना सोराठिया इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला है।

फेज-4- चौका गांव से कैमाहा बैरियर तक (43 किमी) का निर्माण 688 करोड़ की लागत से एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर गुजरात को आवंटित किया गया है।

कस्वामियों को मुआवजा राशि सीधे खातों में डाली जा रही है। अब बहुत विवादित है या बैंक खातों से जुड़ी कोई तकनीकी समस्या है। जल्द ही इनका बचे हैं। इनमें वे मामले जिनके दस्तावेज अपूर्ण हैं. भूमि निराकरण कर लिया जाएगा। अखिल राठौर, एसडीएम, छतरपुर

राजद के कई बड़े नेता और तेजश्री यादव की पत्नी ने कहा था कि बिहार में खेल होना अभी बाकि है। ऐसा होने के डर से ही नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा के नजदीक चाणक्य होटल में रात को रुकवाया।

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लव सोनकर

लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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