AI-generated Summary, Reviewed by Patrika
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जिले में कृषि विभाग में लगातार हो रहे घोटाले और अनियमितताओं के बीच विवादित अधिकारी डॉ. कबीर कृष्ण वैद्य को फिर से तीन अहम पदों का प्रभार सौंपा गया है। कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र, नौगांव (छतरपुर) के प्राचार्य के पद के साथ-साथ उन्हें प्रभारी उप संचालक कृषि और परियोजना संचालक आत्मा का जिम्मा भी दिया गया है। डॉ. वैद्य को केवल तीन माह पहले ही सितंबर में डीडीए और परियोजना संचालक आत्मा के पद से हटाया गया था। उन्हें बीज और खाद वितरण में गड़बड़ी और फाइलों को दबाने जैसे आरोपों में संलिप्त बताया गया था। अब फिर से उन्हें पद सौंपे जाने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारों का कहना है कि डॉ. वैद्य के पूर्व कार्यकाल में किसानों को वितरित किए गए मूंगफली और सोयाबीन के बीजों का भुगतान अब तक लंबित है। वर्ष 2024-25 के दौरान उन्होंने बीज और खाद वितरण में अव्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया और कई मामलों में अवैध तरीके से कार्यवाही की गई। शिकायतों के बाद कई वितरण कार्यों को रोककर जांच की गई, लेकिन संबंधित फाइलों को दबाने की वजह से समस्या आज भी हल नहीं हुई है।
रबी सीजन में किसानों को जौ का बीज थमाने में भी संलिप्तता सामने आई। बीज समितियों से सांठगांठ करके वितरण कराया गया, किसानों ने आपत्ति जताई, लेकिन संबंधित अधिकारियों के माध्यम से मामला दबा दिया गया। इसी प्रकार बालाजी ट्रेडर्स को बड़ी मात्रा में अवैध खाद उपलब्ध कराने के मामले में भी वैद्य की भूमिका संदिग्ध रही है।
छतरपुर जिले के प्रभारी मंत्री एंदल सिंह कसाना के प्रशासनिक क्षेत्र में बार-बार डीडीए का चार्ज बदलने और विभागीय व्यवस्था में गड़बड़ी होने से उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि शासन स्तर से रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति नहीं की जाती है तो भविष्य में बड़ी अनियमितताओं और विवादों का खतरा बना रहेगा। किसानों और अधिकारियों के अनुसार, डीडीए वैद्य को पुन: पद देने से खाद की कालाबाजारी और अवैध वितरण की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। विभागीय नियमों के अनुसार पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन लगातार चार्ज बदलने और पुराने आरोपों के बावजूद पुन: पदस्थापना से विभाग की छवि प्रभावित हो रही है।
कृषि विभाग में बीज और खाद वितरण में हुई गड़बड़ी के मामले अब भी संदिग्ध बने हुए हैं। डॉ. वैद्य को फिर से पद सौंपे जाने के बाद किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच असंतोष बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तरीय जांच और स्थायी नियुक्ति आवश्यक है, ताकि किसानों का हित और विभाग की विश्वसनीयता बनाए रखी जा सके।
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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Updated on:
27 Dec 2025 10:42 am
Published on:
27 Dec 2025 10:41 am


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