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तीन दशक बाद जैन विश्व भारती में गूंजेंगे योगक्षेम के स्वर, लाडनूं में शुरू होगा साधना का ÒमहाकुंभÓ

देश के आध्यात्मिक केन्द्रों में लाडनूं की धरा एक बार फिर नया इतिहास रचोगी। जिसके क्रम में तेरापंथ धर्मसंघ के नव निर्माता आचार्य तुलसी की जन्मस्थली पर 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 'योगक्षेमवर्ष' का विराट आयोजन होने जा रहा है।

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चूरू.लाडनूं. अनेकांत, अहिंसा, सहिष्णुता और शांति सद्भाव का संवाहक रहा लाडनूं का जैन विश्वभारती में एक बार फिर साधना का महाकुंभ होगा। आचार्य महाश्रमण के आगमन और उनके प्रवास से लाडनूं (Ladnun) तीर्थ स्थल में जहां आध्यात्मिक की ज्योत प्रज्ज्वलित होगी वहीं वर्षभर ज्ञान और ध्यान की धारा प्रवाहित होगी।

सेवा का वैश्विक केन्द्र

देश के आध्यात्मिक केन्द्रों में लाडनूं की धरा एक बार फिर नया इतिहास रचोगी जिसके क्रम में तेरापंथ धर्मसंघ के नव निर्माता आचार्य तुलसी की जन्मस्थली पर 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 'योगक्षेमवर्ष' का विराट आयोजन होने जा रहा है। फरवरी 2027 तक चलने वाले इस एक वर्षीय प्रवास के दौरान जैन विश्व भारती परिसर न केवल आस्था का केंद्र होगा, बल्कि यह साधना, शिक्षा और सेवा के एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरेगा।

1989 में मनाया योगक्षेम वर्ष

वर्ष 1989 में आचार्य तुलसी के समय यहां योगक्षेम वर्ष मनाया गया था। अब आचार्य महाश्रमण 400 साधु-साध्वियों, समणी-मुमुक्षुओं के वृहत संघ के साथ उसी विरासत को गतिमान करेंगे।

ज्ञान और ध्यान का अनूठा संगम

इस प्रवास को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए, इसे एक 'बौद्धिक और आध्यात्मिक कार्यशाला' का रूप दिया गया है। साधु-साध्वियों के गहन अध्ययन और प्रशिक्षण के लिए विशेष रूप से 'बोधिगृहम' तैयार किया गया है, जहां आचार्यश्री के सान्निध्य में प्रतिदिन विशेष कक्षाएं चलेंगी।

चित्त समाधि शिवरों की शृंखला

जैन विश्व भारती में आम श्रद्धालुओं और तनावग्रस्त मानव जाति के लिए 'चित्त समाधि शिविरों' की नई शृंखला शुरू की जा रही है। इसके लिए 'समाधिवरम' भवन निर्धारित किया गया है, जहां साल भर सात दिवसीय आवासीय शिविरों के माध्यम से लोगों को मानसिक शांति के प्रयोग करवाए जाएंगे।

सृजित की सुविधाएं

योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद एवं जैविभा अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़ ने तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि जैन विश्व भारती परिसर को एक आधुनिक टाउनशिप की तर्ज पर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि हजारों आगंतुकों को ठहराने के लिए अर्हम कुंज, एकत्वम, आर्जवम, जय निलयम और गुवाहाटी भवन जैसे पक्के भवनों के साथ-साथ बड़ी संख्या में अस्थाई कॉटेज भी बनाए गए हैं।

प्रमुख आकर्षण

प्रवचन: विशाल जनमेदिनी के लिए नव्य भव्य 'सुधर्मासभा' आध्यात्मिक आभा लिए तैयार है।

चिकित्सा: अत्याधुनिक मशीनों से लैस 'निरामयम चिकित्सा केंद्र' देगा अहर्निश सेवा। शिक्षा व पर्यावरण: नए सत्र से 'महाप्रज्ञ प्रोग्रेसिव स्कूल' का आगाज होगा। साथ ही पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए कामधेनु पार्क, जय कुंजर पार्क और युवाओं के लिए ओपन जिम व झूले लगाए गए हैं।

उत्सवों का वर्ष आनेवाले संवत्सर

आने वाला संवत्सर लाडनूं के लिए उत्सव का साल होगा। महावीर जयंती, जन्मोत्सव, पट्टोत्सव, अक्षय तृतीया, चातुर्मास और मर्यादा महोत्सव जैसे धर्मसंघ के सबसे बड़े कार्यक्रम इसी प्रवास के दौरान होंगे। देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए अभी से लाडनूं पहुंचने लगे हैं।