
देवरिया मजार (PC- X)
Deoria Mazar controversy : उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में मजार पर बुलडोजर चलाए जाने का मामला अब राज्य स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है। बंजर भूमि पर बनी बताई जा रही वक्फ मजार को लेकर राष्ट्रपति सचिवालय ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को मामले में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इस प्रकरण की शिकायत पूर्व राज्यसभा सांसद आस मोहम्मद ने राष्ट्रपति कार्यालय में की थी। राष्ट्रपति सचिवालय के निदेशक शिवेंद्र चतुर्वेदी की ओर से शिकायत को संज्ञान में लेते हुए इसे प्रदेश के मुख्य सचिव को अग्रेषित किया गया है।
आस मोहम्मद का कहना है कि सूफी संत गनी शाह बाबा की मजार लंबे समय से अस्तित्व में है और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में विधिवत दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया है कि हाल के महीनों में कुछ संगठनों की ओर से मजार हटाने को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। शिकायत में कहा गया है कि प्रशासन ने इसी दबाव में भूमि को सरकारी बंजर घोषित कर बुलडोजर से मजार के ढांचे का एक हिस्सा तोड़ दिया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मजार प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आयोग को जल्द ही पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
तहसील प्रशासन का दावा है कि गोरखपुर रोड पर रेलवे ओवरब्रिज के नजदीक मेहड़ा नगर इलाके में स्थित यह मजार नान-जेड-ए श्रेणी की बंजर जमीन पर बनाई गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 1399 फसली की खतौनी में जमीन बंजर दर्ज है। प्रशासन का यह भी कहना है कि वर्ष 1993 में एडीएम वित्त एवं राजस्व के कथित फर्जी आदेश के आधार पर मजार और कब्रिस्तान का इंद्राज राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराया गया था। जून 2025 में विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी की शिकायत पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के तहत इस प्रविष्टि को रद्द कर दिया गया।
प्रशासन के अनुसार, आरबीओ अधिनियम की धारा-10 के तहत हाल के वर्षों में किए गए निर्माण को अवैध मानते हुए सक्षम प्राधिकारी की अदालत ने उसे हटाने के आदेश दिए थे। इसी आदेश के तहत 11 जनवरी 2026 को मजार समिति के अध्यक्ष मो. राशिद खां समेत अन्य पदाधिकारियों की मौजूदगी में गुंबद और अन्य निर्माण ढहाए गए। राष्ट्रपति सचिवालय और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की दखल के बाद मामला अब पूरी तरह संवेदनशील हो गया है। आगे की कार्रवाई प्रदेश सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगी।
Published on:
07 Feb 2026 07:04 pm
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