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मिड डे मील बनी माजक, तीन माह से अटका जिले के राजकीय स्कूलों का बजट

-कुक कम हेल्पर्स को पुराने मानदेय के हिसाब से मिली राशि धौलपुर.जिले में शैक्षिक सत्र की शुरुआत से ही उधारी की भेंट चढ़ चुकी मिड डे मील योजना महीनों बाद भी सुचारू नहीं हो पाई है। अभी भी जिले के स्कूलों को छात्रों के दोपहर के भोजन की राशि का पिछले तीन महीनों का पैसा […]

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मिड डे मील बनी माजक, तीन माह से अटका जिले के राजकीय स्कूलों का बजट Mid-day meal becomes a joke, budget of government schools of the district stuck for three months

-कुक कम हेल्पर्स को पुराने मानदेय के हिसाब से मिली राशि

धौलपुर.जिले में शैक्षिक सत्र की शुरुआत से ही उधारी की भेंट चढ़ चुकी मिड डे मील योजना महीनों बाद भी सुचारू नहीं हो पाई है। अभी भी जिले के स्कूलों को छात्रों के दोपहर के भोजन की राशि का पिछले तीन महीनों का पैसा अटका हुआ है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्था को सुधारने के कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। तो वहीं कुक कम हेल्पर्स को बढ़ा हुआ नहीं बल्कि पुराने मानदेय के हिसाब से भुगतान किया गया है।

यहां यह बता दें कि जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक कार्यालय ने जिले के 1180 के आस पास सरकारी स्कूलों, मदरसों एवं संस्कृत विद्यालयों में पढऩे वाले कक्षा 1-8 तक के बच्चों को मिड डे मील योजना के तहत दोपहर का भोजन की पोषाहार लागत राशी एवं कुक कम हेल्पर्स का बजट दिया जाता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और धीमी रफ्तार की वजह से स्कूलों को अभी भी पिछले साल एक नवंबर से पैसा जारी नहीं किया गया है। ऐसे में बिना बजट और लंबे समय से उधारी के बीच मिड डे मील योजना को चलाने में संस्था प्रधानों एवं पोषाहार प्रभारियों के लिए मुसीबत का सबब बन कर रह गया है।

अनेक स्कूलों को शैक्षिक सत्र की शुरुआत से ही नहीं मिला बजट

दो चरणों में पिछले माह करीब 353 और इस महीने 790 स्कूलों को जुलाई से अक्टूबर तक कन्वर्जन कॉस्ट एवं कुक मानदेय का दिसंबर तक का बजट जारी किया, लेकिन तीन दर्जन के करीब ऐसे स्कूल अब भी हैं, जिन्हें विभाग की ओर से जुलाई से बकाया चल रहे पोषाहार और कुक मानदेय व्यय का पैसा नहीं दिया है। ऐसे में इन विद्यालयों में छात्र छात्राओं का भोजन तैयार करने बाली कुक कम हेल्पर्स भी पिछले 7 महीनों से मानदेय को तरस रहीं हैं।

कुक कम हेल्पर्स का बढ़ा मानदेय भी नहीं मिला

बच्चों के लिए दोपहर का भोजन तैयार करने वाली मिड डे मील वर्कर्स के मानदेय में पिछले बजट में सरकार की ओर से अप्रेल 2025 से बढ़ोत्तरी कर 2143 रुपए के स्थान पर 2297 रुपए मासिक किया गया था, लेकिन सरकार के आदेश के बाबजूद इन कुक कम हेल्पर्स को अप्रेल से अगस्त तक बढ़े हुए मानदेय देने की बजाय पुराने मानदेय के हिसाब से ही स्कूलों को बजट जारी किया है।

मिड डे मील योजना के तहत राजकीय स्कूलों को अक्टूबर तक का बजट जारी कर दिया गया है। तो वहीं कुक कम हेल्परों को भी दिसंबर तक का मानदेय दिया गया है। हेल्परों को जो मानदेय दिया गया है वह बढ़े मानदेय 2297 रुपए के हिसाब से ही दिया गया है।

-आरडी बंसल, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक

डीईओ कार्यालय की ओर से जिले के स्कूलों को मिड डे मील योजना के तहत कन्वर्जन कॉस्ट एवं कुक कम हेल्पर्स मानदेय का बजट समय पर नहीं दिया जा रहा है। अभी भी छात्रों के पोषाहार का तीन महीनों का पैसा अटका हुआ है।अनेक स्कूलों को तो जुलाई से बजट नहीं मिला है।

-राजेश शर्मा,पूर्व प्रदेश महामंत्री रापंमाशिसं