
साबला। मेले के प्रथम दिन उमड़े भक्तगण। फोटो पत्रिका
Beneshwar Mela : आस्था, अध्यात्म और लोक संस्कृति के संगम स्थल बेणेश्वर धाम पर गुरुवार को माघ एकादशी पर वार्षिक मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ। बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले की सीमा पर बेणेश्वर धाम स्थित है। प्रसिद्ध बेणेश्वर मेला आदिवासियों का महाकुंभ कहा जाता है।
पीठाधीश्वर अच्युतानंद महाराज और सुराता धाम के रतनगिरी महाराज के सानिध्य में राधाकृष्ण मंदिर के शिखर पर सप्तरंगी ध्वजारोहण के साथ 10 दिवसीय मेले की शुरुआत हुई। मेले का मुख्य शाही स्नान 1 फरवरी (माघ पूर्णिमा) को होगा।
शंख ध्वनि, ढोल-नगाड़ों और 'मावजी महाराज' के जयकारों के बीच पंडित हिमांशु पंड्या व हरिओम रावल के मंत्रोच्चारण के साथ भगवान निष्कलंक और ध्वजा का पूजन किया गया। इसके पश्चात मेला मजिस्ट्रेट अभिलाषा ने नारियल वधेर कर और पूर्व विधायक गोपीचंद मीणा ने ढोल की थाप के साथ मेले का औपचारिक उद्घाटन किया।
इस अवसर पर तहसीलदार मोहनलाल बारिया, मेला अधिकारी वालसिंह राणा, पुलिस उपाधीक्षक प्रभुलाल सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। संचालन गजेंद्र भावसार ने किया।
गुरुवार को ठंड बढ़ने के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। धाम पर भक्ति की सरिता बहती नजर आई। इस मौके पर नारायण भाई साद, गिरधारीलाल साद और साद मंडली ने ढोल-मजीरों की थाप पर मावजी महाराज के भजनों की प्रस्तुति दीं। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
भक्तों को आशीर्वाद देते हुए महंत अच्युतानंद ने कहा, भारत की असली पहचान अनेकता में एकता है। यह सप्तरंगी ध्वजा सात वार और सात ऋषियों के समागम का प्रतीक है। उन्होंने देश और प्रदेश की खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। इस मौके पर नरहरि भट्ट, नारायण साद, धवल साद, गिरिधारीलाल साद, प्रवीण साद कई साधुसंत, कोटलाव व भक्त मौजूद रहे।
Published on:
30 Jan 2026 12:49 pm
बड़ी खबरें
View Allडूंगरपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
