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UPSC Notification: ऐसे अभ्यर्थी अब बार-बार नहीं दे पाएंगे यूपीएससी परीक्षा, बदल गए नियम, जानें डिटेल्स

UPSC New Rules: जो उम्मीदवार CSE 2026 में चयनित होने के बाद CSE 2027 देना चाहते हैं, उन्हें संबंधित अनुमति लेनी होगी।

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भारत

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Anurag Animesh

Feb 05, 2026

UPSC Exam New Rules

UPSC Exam New Rules(Image-Freepik)

UPSC Notification: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बार नोटिफिकेशन सिर्फ आवेदन प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई अहम नियमों में बदलाव भी किए गए हैं। खासतौर पर उन उम्मीदवारों के लिए नए प्रावधान लागू किए गए हैं, जो एक बार चयनित होने के बाद फिर से परीक्षा देकर अपनी रैंक या सर्विस बदलना चाहते हैं। UPSC ने साफ कर दिया है कि अब सिविल सेवा परीक्षा के जरिए किसी सेवा में चयनित होने के बाद उम्मीदवारों को अनगिनत मौके नहीं मिलेंगे। नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी अभ्यर्थी का चयन 2026 में IPS में होता है, तो वह केवल 2027 में ही बेहतर रैंक या दूसरी सेवा के लिए परीक्षा दे सकता है। इसके बाद अगर वह फिर से परीक्षा देना चाहता है, तो उसे पहले अपनी नौकरी छोड़नी पड़ेगी।

UPSC Notification: पहले से चयनित उम्मीदवारों के लिए नई शर्तें


नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो उम्मीदवार पहले से IPS या किसी अन्य ग्रुप-ए सेवा में चयनित हैं, वे CSE 2026 के जरिए दोबारा IPS हासिल नहीं कर पाएंगे। यानी एक ही सेवा को दोबारा पाने का रास्ता लगभग बंद कर दिया गया है।

UPSC Exam New Rules: सिर्फ एक बार मिलेगा रैंक सुधारने का मौका


नई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार को CSE 2026 के जरिए ग्रुप-ए सेवा या IPS मिलता है, तो उसे केवल एक बार यानी CSE 2027 में रैंक सुधारने का अवसर दिया जाएगा। यह छूट फाउंडेशन कोर्स तक ही सीमित रहेगी। अगर उम्मीदवार ट्रेनिंग जॉइन नहीं करता और रैंक सुधारने की छूट भी नहीं लेता, तो CSE 2026 और CSE 2027 के आधार पर मिली सेवाएं स्वतः निरस्त मानी जाएंगी। यानी उम्मीदवार को तय समय में फैसला लेना जरूरी होगा।

UPSC: आगे परीक्षा देने के लिए अनुमति और इस्तीफा जरूरी


जो उम्मीदवार CSE 2026 में चयनित होने के बाद CSE 2027 देना चाहते हैं, उन्हें संबंधित अनुमति लेनी होगी। वहीं यदि कोई अभ्यर्थी 2028 या उसके बाद फिर से परीक्षा में बैठना चाहता है, तो उसके लिए नौकरी से इस्तीफा देना अनिवार्य कर दिया गया है। UPSC के इन नए नियमों को सिविल सेवा परीक्षा की पारदर्शिता और गंभीरता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे उन उम्मीदवारों को ज्यादा मौके मिल सकते हैं, जो पहली बार परीक्षा दे रहे हैं। साथ ही, चयनित अफसरों को अपने करियर को लेकर जल्द और स्पष्ट निर्णय लेने की जरूरत पड़ेगी।