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उम्र साबित होते ही बदल गया पूरा मामला, कोर्ट ने बॉयफ्रेंड को सुनाई 20 साल सजा, गर्लफ्रेंड ने कहा…

गाजियाबाद की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग लड़की से जुड़े मामले में दिल्ली के युवक को 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई।

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Court orders

फाइल फोटो

Ghaziabad Crime News: गाजियाबाद की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने दिल्ली के एक युवक को 20 साल की कठोर कैद की सजा दी है। यह फैसला पॉक्सो एक्ट के तहत आया है। जज नीरज गौतम ने 9 जनवरी को यह सजा सुनाई। कोर्ट ने आरोपी को अपहरण (धारा 363 IPC ) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दोषी ठहराया। साथ ही 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जो पीड़िता के पुनर्वास के लिए दिया जाएगा।

मामला कब और कैसे शुरू हुआ?

यह पूरा मामला साल 2021 का है। उस समय लड़की की उम्र सिर्फ 16 साल थी। 28 जून 2021 को आरोपी युवक ने लड़की को बहला-फुसलाकर उसके घर से ले गया था। लड़की के पिता ने 11 जुलाई 2021 को गाजियाबाद के लोनी थाने में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी ने उनकी नाबालिग बेटी को अगवा कर लिया। पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों को दिल्ली के नरेला इलाके में एक किराए के मकान से ढूंढ निकाला।

पुलिस ने जांच में क्या किया?

लड़की के बयान के बाद पुलिस ने मामले में और धाराएं जोड़ीं। 17 जुलाई 2021 को पुलिस ने रेप (धारा 376 आईपीसी) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। 10 अक्टूबर को कोर्ट ने आरोप तय किए और मुकदमे की सुनवाई शुरू हो गई।

कोर्ट में लड़की ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान लड़की ने कोर्ट में साफ कहा कि वह आरोपी (जो उसका बॉयफ्रेंड था) के साथ अपनी मर्जी से गई थी। दोनों ने दिल्ली में एक मंदिर में शादी भी की और शारीरिक संबंध भी सहमति से बने। लेकिन क्रॉस एग्जामिनेशन में लड़की ने यह भी माना कि आरोपी ने उसे कुछ धमकियां दी थीं।

उम्र का सबूत सबसे महत्वपूर्ण रहा

कोर्ट में लड़की के स्कूल प्रिंसिपल ने दस्तावेज दिखाए, जिसमें उसकी जन्मतिथि 5 अप्रैल 2005 दर्ज थी। इससे साबित हुआ कि घटना के समय लड़की नाबालिग (16 साल) ही थी। सरकारी वकील ने कहा कि लड़की ने अपने बयान में संबंध बनाने की बात मानी है और वह अपने पहले बयान पर कायम रही।

कोर्ट का अंतिम फैसला

सभी गवाहों, सबूतों और दस्तावेजों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना। कोर्ट ने माना कि भले ही लड़की ने सहमति बताई हो, लेकिन कानून के अनुसार 18 साल से कम उम्र की लड़की की सहमति वैध नहीं मानी जाती। इसलिए आरोपी को सख्त सजा सुनाई गई।