
बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह फोटो सोर्स पत्रिका
यूजीसी कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने को लेकर नेता बृजभूषण शरण सिंह ने अदालत के फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश और समाज के हित में है। इस दौरान वे पसका ग्राम पंचायत में शोक व्यक्त करने पहुंचे थे।
बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने यूजीसी कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के फैसले को बहुत अच्छा बताया है। उन्होंने कहा कि अगर इस कानून पर रोक नहीं लगती। तो पूरे देश का सामाजिक ताना-बाना बिगड़ सकता था। इससे समाज में तनाव और आपसी नफरत बढ़ने की आशंका थी। जिसकी जिम्मेदारी सरकार पर आती। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से समाज में शांति बनी रहेगी। और लोगों के बीच गलतफहमियां नहीं फैलेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले उसके सामाजिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी होता है। यूजीसी कानून को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध देखा जा रहा था। कई सामाजिक संगठन और छात्र इसे समाज को बांटने वाला बता रहे थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की रोक से लोगों को राहत मिली है। यह बयान उन्होंने पसका ग्राम पंचायत में पिंकू प्रधान के पिता बलराज सिंह के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने के बाद मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए कहा।
यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर मचे बवाल के बीच पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह नियम बनाने वालों पर कड़ा प्रहार किया है। यूजीसी के प्रावधानों पर एतराज जताते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि एसी कमरों में बैठकर कानून बनाने से समाज नहीं चल सकता। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह इस कानून के पूर्णतया विरोध में हैं। तथा सरकार से अपील की इस कानून को तत्काल वापस लिया जाए। पूर्व सांसद ने कहा कि कल मैंने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। और प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए मैंने अपने गांव को चुना क्योंकि मैं बहुत दिनों से देखता हूं कि गांव के छोटे-छोटे बच्चे जिसमें दलित समाज के भी बच्चे हैं। पिछड़े समाज के भी बच्चे हैं। लगभग प्रतिदिन आते हैं। हमारे बच्चों के साथ खेलते हैं। यह बिल आया तो उसको लेकर के पूरे देश में बहुत बड़ा आक्रोश है।
मैं दिल्ली गया वहां पर भी मैंने कुछ बुद्धिजीवी है। जो इसको भली भांति समझते हैं। हमने समझने की कोशिश की और समझा। तो इसी के दृष्टि से मैंने एक बयान दिया कि यह बिल एक तरफा है। इसमें एक समाज को शोषित मान लिया गया है। तथा एक समाज को पीड़ित मान लिया गया है। और जो शोषित समाज है। उसका कोई नुमाइंदा भी उसे कमेटी में नहीं रहेगा। तो यह बिल समाज को बांटने का काम करेगा। यह किस मंशा से लाया गया। मुझे यह मालूम नहीं लेकिन इस बिल से समाज में तनाव पैदा हो रहा है। तो मेरा यह कहना है कि इसमें जो ओबीसी के बच्चे हैं। या दलित समाज के वह बच्चे हैं। जो सारी स्थिति को समझते हैं। उनको भी इसमें आगे आना पड़ेगा। यह केवल सवर्ण समाज की ही पीड़ा नहीं है। यह सर्व समाज की पीड़ा है। और मैंने एक बात कही कि ऑफिस में बैठकर के आप निर्णय न लें। आप गांव में आए और देखें की कैसे गांव में सर्व समाज मिलकर के रहता है।
आज फिर मेरा आग्रह यही है। कि यह एक तरफा है। इस पर तनाव फैल रहा है। नफरत फैल रही है। तो इस बिल पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। और देश का माहौल बहुत ज्यादा खराब हो रहा है। यह खराब नहीं होना चाहिए। रुकना चाहिए। इसीलिए मैं चाहता हूं कि इसका कोई रास्ता सरकार निकाले। आंदोलन के सवाल पर पर कहा कि आंदोलन तो जगह-जगह हो रहे हैं। छोटे-छोटे समूह में हो रहा है। जिले स्तर पर हो रहा है। प्रदेश स्तर पर हो रहा है। तो यह व्यापक रूप धारण करें तो इसके पहले सरकार को विचार करना चाहिए।
Published on:
29 Jan 2026 04:42 pm
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