
जिस मरीज के इलाज में लापरवाही की बात पर बीआरडी के जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदार को पीट दिया था, सोमवार देर शाम उसकी मौत हो गई। लेकिन जूनियर डाॅक्टरों की दबंगई ऐसी कि परिजनों को उसके शव के लिए गुहार लगानी पड़ी।
शव लेने के लिए लगानी पड़ी गुहार
देर रात शव इस शर्त पर दिया गया कि परिजन चुपचाप घर जाकर इसका अंतिम संस्कार कर देंगे। मंगलवार को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं इस मामले में पुलिस ने दोनों तरफ से तहरीर होने के बावजूद केवल डॉक्टर के आरोप पर तीमारदार के खिलाफ ही केस दर्ज किया है। वहीं कॉलेज प्रशासन ने तीन दिन बाद भी इस प्रकरण में कोई जांच शुरू नहीं की है।
जानिए पूरा मामला
संतकबीरनगर जिले के बेलौली गांव के रहने वाले रामसेवक त्रिपाठी को पेट दर्द की शिकायत के बाद बीआरडी के मेडिसिन इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। रामसेवक के साथ आए उनके दामाद सहजनवा क्षेत्र के भड़सार गांव निवासी रमेश मिश्र बताते हैं कि रविवार सुबह करीब 11 बजे वेंटिलेटर बंद था। हमने वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से केवल इतना पूछा कि मशीन बंद क्यों है? डॉक्टर इतनी सी बात पर भड़क गए और मरीज को लेकर किसी प्राइवेट अस्पताल जाने को कहने लगे।हमने प्रतिवाद किया तो डॉक्टर भड़क गए और गाली देते हुए कालर पकड़ लिया। अपने बचाव में हमने उनका हाथ पकड़कर झटका दिया तो उनका आला (स्टेथोस्कोप) गिर गया। कुछ लोगों ने हमें पकड़कर वार्ड से बाहर कर दिया। मामला बीआरडी गेट पर स्थित पुलिस चौकी में गया तो वहां हमने अपनी ही गलती मान ली लेकिन इसके बाद डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती और सोमवार शाम को उनके ससुर की मौत हो गई।
कर्मचारी बोले, चुपचाप शव लेकर चले जाओ
मृतक रामसेवक के बेटे संदीप सदमे में है। पिता के अंतिम कर्म में लगे संदीप घटना का जिक्र छिड़ते ही फफक पड़े। पिताजी को इलाज कराने लेकर गए थे, वहां तो बड़ी मुश्किल से लाश मिली। इलाज भी नहीं किया, मेरे जीजा को मारा और मुकदमा भी दर्ज कराया। वे बोल रहे थे कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। कई कर्मचारियों ने सुझाव दिया कि शिकायत करने से कहीं कुछ नहीं होगा, चुपचाप शव लेकर जाओ और क्रियाकर्म कर लो। हमें भी यही उचित लगा, गांव आकर क्रिया कर्म कर रहे हैं।
अब एसएसपी से मिलकर देंगे तहरीर
मृतक के दामाद रमेश मिश्रा का कहना है कि मेरे साथ जो घटना हुई, उसमें भी मैं समझौता करने को तैयार था। यहां तक कि पुलिस चौकी में यह तक कहा कि अगर खींचतान में स्टेथोस्कोप टूट गया है तो उसका भी दो-चार हजार रुपये दे दूंगा। लेकिन इसके बाद डॉक्टर गाली देने लगे और कहा कि यह मशीन 25 हजार की आएगी। ससुर के इलाज के लिए मैं वहां से चुपचाप हट गया। यहां तक कि ससुर की मौत के बाद केवल डॉक्टरों के दुर्व्यवहार के डर से दुबारा मेडिकल कॉलेज भी नहीं गया। ऐसा लगता है कि विवाद के बाद से डॉक्टरों ने हमारे मरीज का कोई इलाज नहीं किया। इस वजह से मरीज की मौत हुई है। बुधवार को एसएसपी से मिलकर तहरीर देंगे। अगर वहां से केस दर्ज नहीं हुआ तो फिर कोर्ट का सहारा लेंगे।
बोले CMS
बीआरडी मेडिकल कॉलेज संबद्ध नेहरू अस्पताल के CMS डॉ. बीएन शुक्ला ने बताया की मरीज के तीमारदार व डॉक्टर के बीच हुए विवाद की जानकारी दोनों पक्ष में से किसी ने भी अभी तक नहीं दी है। रही बात शव का पोस्टमार्टम कराने की तो, वह ऐसे केस में ही होता है, जिसमें पुलिस का हस्तक्षेप हो, या संदेह के आधार पर घरवाले ऐसा चाहते हों। पीड़ित पक्ष को अगर पोस्टमार्टम कराना होता तो वह पुलिस की मदद ले सकते थे। पुलिस की निगरानी में पोस्टमार्टम हो जाता। लेकिन, वह अपनी इच्छा से शव लेकर गए। जब तक पीड़ित पक्ष सामने आकर कॉलेज या अस्पताल के जिम्मेदार अफसर को अपना लिखित शिकायती पत्र नहीं देता, इसकी जांच क्या होगी।
Published on:
24 Apr 2024 09:29 am
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