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साइबर अपराधों में तकनीकी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल होते हैं, जिनसे छेड़छाड़ की पूरी आशंका

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने साइबर फ्रॉड के मामले आरोपी कुलदीप शर्मा को को जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि मामला अत्यंत गंभीर है और इसमें अपनाया गया तरीका सुनियोजित साइबर अपराध की ओर इशारा करता है। कोर्ट ने माना कि इस स्तर पर जमानत देने […]

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हाईकोर्ट की एकल पीठ ने साइबर फ्रॉड के मामले आरोपी कुलदीप शर्मा को को जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि मामला अत्यंत गंभीर है और इसमें अपनाया गया तरीका सुनियोजित साइबर अपराध की ओर इशारा करता है। कोर्ट ने माना कि इस स्तर पर जमानत देने से न केवल जांच प्रभावित हो सकती है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी बनी रहेगी।

कुलदीप शर्मा के खिलाफ करेरा थाना, जिला शिवपुरी में केस दर्ज है। पुलिस ने 3 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था। अभियोजन के अनुसार 31 मई 2025 को फरियादिया कविता अग्रवाल को एक अज्ञात कॉल आया। कॉल करने वाले ने आरोप लगाया कि उनके नंबर से आपत्तिजनक बातचीत की गई है और इसी आधार पर उनका मोबाइल नंबर ब्लॉक किया जाएगा। इसके बाद कॉलर ने खुद को मुंबई पुलिस से जोड़ते हुए वीडियो कॉल कराई और फरियादिया को नरेश गोयल ब्लैक मनी घोटाले में शामिल बताया। गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी देकर उन्हें तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। करीब 59 लाख रुपए की ठगी की।

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार 1 जून से 25 जून 2025 तक फरियादिया मानसिक दबाव में रहीं और इस दौरान उन्होंने व उनके पति ने अलग-अलग तारीखों में कई बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की। आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है, रकम अज्ञात खातों में गई है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। यह भी कहा गया कि जांच पूरी हो चुकी है और चालान पेश किया जा चुका है। वहीं पुलिस की ओर से कहा गया कि यह एक संगठित साइबर गिरोह का मामला है, जिसमें पुलिस और जांच एजेंसियों की नकल कर फरियादिया को लगातार डराया गया। इतनी गंभीर साइबर ठगी में जमानत से गवाहों को प्रभावित करने और डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ का खतरा है। कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

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