
फॉग सेफ्टी डिवाइस
ग्वालियर. कोहरे के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी वर्षों से यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई थी, लेकिन इस सीजन में रेलवे की तकनीकी और रणनीतिक तैयारियों ने हालात को काफी हद तक नियंत्रित रखा। फॉग सेफ्टी डिवाइस, ऑटोमैटिक सिग्नङ्क्षलग सिस्टम को मजबूत करने और वैकल्पिक ट्रैक, तीसरी लाइन के इस्तेमाल से ट्रेनों का संचालन सुचारु रहा। इसका असर ये रहा कि फॉग के दिनों में भी ट्रेनें इतनी लेट नहीं हुईं जितनी पिछले वर्षों में होती रही हैं। इससे यात्रियों का औसत 30 से 50 मिनट तक समय बचा है। वहीं लेट ट्रेनें अगले दिन फेरे में वापस आ रही हैं, ऐसी स्थिति भी कुछ ही दिन बनी। रेलवे ने इस सीजन में न केवल एक्सप्रेस ट्रेनों, बल्कि मालगाड़ियों में भी फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाए। यह जीपीएस आधारित डिवाइस लोको पायलट को कम ²श्यता में आने वाले सिग्नल, क्रॉसिंग और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी पहले से देता है, जिससे ट्रेन की गति बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
कोहरा अभी भी चुनौती, 28 फरवरी तक सतर्कता…
भले ही ग्वालियर और आसपास के इलाकों में सर्दी कम हो गई हो और कोहरा लगभग चला गया हो, लेकिन रेलवे 28 फरवरी तक कोहरे की संभावना को देखते हुए सतर्क है। इस दौरान कई ट्रेनें रद्द की गईं या उनके प्लेटफॉर्म/रूट बदले गए हैं।
वैकल्पिक ट्रैक और कनेक्टिंग ट्रेनों की रणनीति
कनेक्टिंग ट्रेनों को दूसरे रैक या वैकल्पिक ट्रैक से समय पर रवाना किया गया। इससे लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन संतुलित रहा और यात्रियों को घंटों इंतजार नहीं करना पड़ा। पिछले वर्षों में कोहरे के कारण ट्रेनें 12 से 14 घंटे तक लेट आती थीं। जम्मू आदि से आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें कभी-कभी 24 घंटे तक की देरी से प्रभावित होती थीं। लेकिन इस बार अधिकांश ट्रेनें केवल 2 से 3 घंटे लेट रही हैं। तीसरी लाइन आदि के विकास ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।
उदाहरण: ताज एक्स. को 1 मार्च से नई दिल्ली से झांसी तक ही चलेगी (अभी ग्वालियर तक आ रही है)।
-बरौनी मेल को सप्ताह में केवल पांच दिन चलाया जा रहा है।
-कुछ अन्य ट्रेनें भी प्रभावित हैं।
लेटलतीफी में कमी
इस बार पहले से ठोस प्लानिंग की गई थी। फॉग सेफ्टी डिवाइस, मजबूत सिग्नलिंग और वैकल्पिक व्यवस्थाओं से ट्रेनों की देरी में काफी कमी आई है।
शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ
एक्सपर्ट
कोहरे के चलते इस बार रेलवे की प्लानिंग काफी कारगर साबित हुई। मालगाड़ियों में भी फॉग डिवाइस लगाने, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और तीसरी लाइन से ट्रेनों को निकालने से यात्रियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा।
पी.पी. चौबे, रिटायर्ड स्टेशन मैनेजर
Published on:
12 Feb 2026 07:03 pm
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